प्रबल हत्याकांड : दोषियों को आजीवन कारावास, खचाखच भरी अदालत में न्यायाधीश डॉ. शहजाद अली ने सुनाई सजा

मृतक की बहन प्राची ने अकेले लड़ी न्याय की लंबी लड़ाई, सजा सुनकर दोषियों और उनके परिजनों की आंखों से छलके आंसू


बिजनौर (चिंगारी)। प्रबल हत्याकाण्ड में परसों दोषी करार दिये गये सभी सातों अभियुक्तों को आज अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही अदालत ने विवेचना में कोताही बरतने के लिये सम्बंधित जांच अधिकारी के विरुद्ध पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखने के आदेश दिये।


अपर सत्र न्यायाधीश/द्वितीय फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश डॉ. शहजाद अली ने दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर सभी सातों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि बचाव पक्ष की ओर से संजय गुप्ता की बीमारी का हवाला देते हुए उन्हें सजा में रियायत देने की मांग की गई, लेकिन अदालत ने सभी को आजीवन कारावास का हुक्म सुनाया। उधर, अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि दोषियों ने बड़ी बेरहमी के साथ मासूम प्रबल की हत्या कर उसका शव ठिकाने की साजिश रची थी, इसलिये इस जघन्य अपराध के लिये उन्हें फांसी की सजा दी जाये।


न्यायाधीश द्वारा सुजा सुनाये जाते ही कटघरे में खड़े दोषियों और अदालत में मौजूद उनके कुछ परिजनों की आंखों से आंसू छलक गये। दोपहर दो बजे सातों मुजरिमों को कड़ी सुरक्षा में अदालत में लाया गया। सभी सातों मुजरिम एकदम शांत रहे और उनके चेहरे पर डर व चिंता की लकीरें साफ नजर आईं। उधर, अपने इकलौते भाई के लिए 14 वर्षों तक इंसाफ की लड़ाई लडऩे वाली प्राची की आंखों में भी वर्षों का दर्द और संघर्ष साफ दिखाई दे रहा था। वह दोषियों को फांसी की सजा दिलाने की मांग और दुआ करती रही।


सुबह से ही जिला जजी परिसर में भारी गहमागहमी रही। सुरक्षा के भी कड़े बंदोबस्त किये गये थे। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। मीडिया कर्मियों के अलावा बड़ी संख्या में लोग यह जानने के लिए अदालत पहुंचे थे कि बहुचर्चित मामले में आखिर अदालत क्या सजा सुनाती है। अदालत खचाखच भरा रही। गौरतलब है कि अदालत ने 29 जुलाई को सातों अभियुक्तों- संजय गुप्ता, विनय अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, राहुल गुप्ता और आशीष उर्फ आशु को दोषी करार देते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था और सजा सुनाने के लिए आज की तारीख तय की गई थी।


बेटे की हत्या ने उजाड़ दिया पूरा परिवार


नगर के मोहल्ला जाटान निवासी प्रबल की 19 दिसंबर 2012 को शहनाई बैंक्वेट हॉल में आयोजित महाराजा अग्रसेन जयंती समारोह के दौरान हत्या कर दी गई थी। छेड़छाड़ का आरोप लगाकर प्रबल की पीट-पीटकर हत्या कर उसके शव को ठिकाने लगा दिया था। इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया था। लोगों में भारी आक्रोश फैल गया था। प्रदर्शन हुए, कैंडल मार्च निकाले गए और दोषियों की गिरफ्तारी के लिये पुलिस पर दबाब बनाया गया। उस समय अग्रवाल समाज के कई प्रमुख लोग महीनों अंडरग्राउंड रहे थे। पुलिस अधिकारियों के खूब वारे-न्यारे हुये थे।