रूस ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का किया समर्थन, मॉरिशस भी साथ…

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को रूस और मॉरिशस का समर्थन मिला है।

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की लंबे समय से चली आ रही दावेदारी को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान रूस ने भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सुरक्षा परिषद के विस्तार की जरूरत पर जोर देते हुए एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की वकालत की।

इसी क्रम में मॉरिशस ने भी भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट समर्थन किया है। मॉरिशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि भारत वैश्विक मामलों में रचनात्मक भूमिका निभा रहा है और इसी आधार पर उसे सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिलनी चाहिए। मॉरिशस ने G4 और L69 समूहों के प्रयासों का भी समर्थन किया है।

रूस ने भारत और ब्राजील की दावेदारी का किया समर्थन

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर रूस का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि परिषद की संरचना में बदलाव करते समय एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जाना चाहिए।

लावरोव ने स्थायी सदस्यता के लिए भारत और ब्राजील की दावेदारी का समर्थन किया। रूस का कहना है कि सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना दुनिया की वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती।

रूस पहले भी भारत की स्थायी सदस्यता की मांग का समर्थन करता रहा है और हालिया बयान को इसी व्यापक रुख की निरंतरता के तौर पर देखा जा रहा है।

जर्मनी और जापान को लेकर रूस का विरोध

भारत की दावेदारी का समर्थन करने के साथ ही रूस ने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों के अतिरिक्त प्रतिनिधित्व को लेकर अपना विरोध भी जाहिर किया।

लावरोव ने विशेष रूप से जर्मनी और जापान को स्थायी सदस्यता देने के विचार पर आपत्ति जताई। रूस का तर्क है कि सुरक्षा परिषद में सुधार का उद्देश्य केवल पश्चिमी देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाना नहीं, बल्कि उन क्षेत्रों और देशों को भी उचित स्थान देना होना चाहिए, जिनका मौजूदा ढांचे में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

इस तरह रूस का रुख एक तरफ भारत और ब्राजील जैसे देशों की स्थायी सदस्यता के समर्थन और दूसरी तरफ पश्चिमी देशों की अतिरिक्त स्थायी सीटों के विरोध, दोनों को जोड़ता है।

‘ग्लोबल साउथ’ के प्रतिनिधित्व पर रूस का जोर

रूस ने सुरक्षा परिषद में ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की जरूरत पर विशेष जोर दिया है। इसमें मुख्य रूप से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों की भूमिका बढ़ाने की बात शामिल है।

भारत लंबे समय से खुद को ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थकों का तर्क है कि दुनिया की बदलती आर्थिक, जनसंख्या और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए परिषद की संरचना में भी बदलाव होना चाहिए।

भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान मिलकर G4 समूह बनाते हैं। चारों देश एक-दूसरे की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करते हैं और सुरक्षा परिषद की व्यापक सुधार प्रक्रिया की मांग करते हैं। सितंबर 2026 में G4 के विदेश मंत्रियों ने भी सुरक्षा परिषद में स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों का विस्तार करने की मांग दोहराई।

मॉरिशस ने भी खुलकर किया भारत का समर्थन

भारत की दावेदारी को मॉरिशस की ओर से भी स्पष्ट समर्थन मिला है। मॉरिशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने संबोधन में कहा कि भारत वैश्विक मामलों में रचनात्मक भूमिका निभा रहा है और उसे सुरक्षा परिषद में स्थायी स्थान मिलना चाहिए।

मॉरिशस ने G4 और L69 के प्रयासों का समर्थन करते हुए अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और न्यायसंगत सुरक्षा परिषद की आवश्यकता पर जोर दिया। मॉरिशस ने साथ ही अफ्रीका के स्थायी प्रतिनिधित्व के मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बताया है।

इससे स्पष्ट होता है कि सुरक्षा परिषद में सुधार की बहस केवल भारत की दावेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के बेहतर प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी इससे जुड़ा हुआ है।

UNSC में अभी कितने स्थायी सदस्य हैं?

वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य और 10 गैर-स्थायी सदस्य शामिल हैं।

स्थायी सदस्यों में:

  • अमेरिका
  • रूस
  • चीन
  • फ्रांस
  • यूनाइटेड किंगडम

शामिल हैं। इन पांचों देशों के पास वीटो पावर है। गैर-स्थायी सदस्य दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं।

भारत अभी सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है। हालांकि, वह कई बार गैर-स्थायी सदस्य के रूप में परिषद का हिस्सा रह चुका है।

भारत की दावेदारी क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?

भारत की स्थायी सदस्यता की मांग के पीछे कई प्रमुख तर्क दिए जाते हैं। इनमें भारत की बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सक्रिय भूमिका, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में योगदान और ग्लोबल साउथ के साथ उसके संबंध प्रमुख हैं।

भारत का कहना है कि 21वीं सदी की वास्तविकताओं को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना में भी दिखाई देना चाहिए। भारत ने सुरक्षा परिषद की स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार का समर्थन किया है। फरवरी 2026 में संयुक्त राष्ट्र की अंतर-सरकारी वार्ताओं में भारत ने भी दोनों श्रेणियों के विस्तार की अपनी स्थिति दोहराई थी।

G4 में भारत के साथ कौन-कौन से देश हैं?

भारत की स्थायी सदस्यता की मुहिम में G4 की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस समूह में चार देश शामिल हैं:

भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान।

ये चारों देश सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं और परिषद में व्यापक सुधार की मांग करते हैं।

22 सितंबर 2026 को G4 देशों के विदेश मंत्रियों ने न्यूयॉर्क में बैठक कर सुरक्षा परिषद सुधार पर चर्चा की। संयुक्त बयान में चारों देशों ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में सुरक्षा परिषद में सुधार पहले से कहीं अधिक जरूरी है।

सुरक्षा परिषद में सुधार की राह आसान नहीं

भारत और अन्य देशों को मिल रहे समर्थन के बावजूद सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का विस्तार अपने आप नहीं हो जाता। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना में बदलाव के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया की आवश्यकता होती है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तावित सुधारों को आवश्यक समर्थन मिलने के बाद संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इसके लिए सदस्य देशों की बड़ी संख्या के समर्थन के साथ मौजूदा स्थायी सदस्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।

यही वजह है कि भारत की दावेदारी को विभिन्न देशों का समर्थन मिलने के बावजूद स्थायी सदस्यता का अंतिम फैसला एक लंबी बहुपक्षीय कूटनीतिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।

भारत के लिए बढ़ता अंतरराष्ट्रीय समर्थन

हाल के दिनों में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को कई देशों और समूहों की ओर से समर्थन मिला है। रूस और मॉरिशस के अलावा सितंबर 2026 में यूरोप के V4 समूह के देशों—हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य—ने भी भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया।

इससे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की बहस एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गई है। हालांकि, सुधार की प्रक्रिया में अलग-अलग क्षेत्रीय समूहों और देशों की अपनी प्राथमिकताएं हैं। इसलिए आगे की प्रक्रिया में व्यापक सहमति बनाना सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक रहेगा।

निष्कर्ष

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को रूस और मॉरिशस से मिले समर्थन ने UNSC सुधार की बहस को नई गति दी है। रूस ने भारत और ब्राजील की दावेदारी का समर्थन करते हुए एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर जोर दिया है, जबकि मॉरिशस ने भारत की वैश्विक भूमिका को आधार बनाकर उसकी स्थायी सदस्यता का समर्थन दोहराया है।

वहीं, G4 देशों की ओर से सुरक्षा परिषद की स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार की मांग जारी है। हालांकि भारत को कई देशों का समर्थन मिल रहा है, लेकिन UNSC की संरचना में वास्तविक बदलाव के लिए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति और औपचारिक सुधार प्रक्रिया को पूरा करना आवश्यक होगा।