बिजनौर में औद्योगिक गलियारे की तैयारी तेज़ – मेरठ‑पौड़ी हाईवे और गोरखपुर‑शामली एक्सप्रेसवे के किनारे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज़
11,544 करोड़ रुपये के एमओयू से विकास को नई गति – रोजगार और उद्योगों के अवसर बढ़ेंगे
औद्योगिक गलियारे की तैयारी तेज़
बिजनौर में विकास की रफ्तार को नई दिशा देने के लिए औद्योगिक गलियारे की तैयारी तेज़ हो गई है। मेरठ-पौड़ी हाईवे-119 और प्रस्तावित गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक निवेश को उतारने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
तहसील सदर के 10 चयनित गांवों में भूमि अंश निर्धारण का काम प्रारंभ हो गया है। यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के भू-अर्जन अधिकारी राकेश कुमार गुप्ता ने सरकारी और निजी भूमि के अंश निर्धारण की समीक्षा की। इस प्रक्रिया के बाद भूमि अधिग्रहण का काम आगे बढ़ेगा।
निरीक्षण और चयनित गांव
जून 2026 में यूपीडा अधिकारियों ने नायब तहसीलदार सार्थक चावला और राजस्व विभाग की टीम के साथ स्थलीय निरीक्षण किया था। उस दौरान ग्राम पपावर खुर्द, इस्लामपुर जलाल, अलीपुर माखन, खाना पट्टी, उलकपुर, स्वाहेड़ी बुजुर्ग, यूसुफाबाद, किशनपुर और मुंढाला को औद्योगिक गलियारे के लिए प्रस्तावित भूमि के रूप में चिन्हित किया गया था।
वर्तमान में इन गांवों में निजी भूमि मालिकों और सरकारी भूमि का अंश निर्धारण किया जा रहा है। साथ ही नदियों, नालों और नलकूपों की सत्यापन प्रक्रिया भी चल रही है, ताकि अधिग्रहण के दौरान किसी प्रकार की बाधा न आए।
बैठक और समीक्षा
गुरुवार को तहसील सदर में आयोजित बैठक में भू-अर्जन अधिकारी राकेश कुमार गुप्ता ने अंश निर्धारण कार्य की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने बताया कि यह कार्यवाही 1359 फसली सरकारी रिकार्ड के आधार पर होगी। बैठक में तहसीलदार सदर अशीष सक्सेना और चयनित गांवों के लेखपाल भी मौजूद रहे।
विकास और रोजगार की संभावनाएं
औद्योगिक गलियारा बनने से बिजनौर में विकास की रफ्तार तेज होगी। उत्तराखंड की सीमा से सटे इस जनपद में अभी उद्योगों की संख्या कम है, जबकि भूमि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। ऐसे में प्रदेश सरकार का पूरा ध्यान यहां औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने पर है।
इस परियोजना के लिए पहले ही 11,544 करोड़ रुपये के एमओयू साइन हो चुके हैं। जिला प्रशासन ने तहसील सदर के मंडावर क्षेत्र में मालन नदी के बांये छोर के आठ गांवों की 1,175 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की थी। औद्योगिक गलियारा बनने के बाद दूसरे प्रदेशों से आवाजाही आसान होगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।








