भाकियू की महापंचायत: किसानों के हितों के लिए उठी आवाज
मुजफ्फरनगर में पहली रात्रि महापंचायत
मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की पहली रात्रि महापंचायत आयोजित हुई। इस सभा में देशभर से किसान संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। महापंचायत की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने की, जबकि संचालन धीरज लाटियान ने किया।
राकेश टिकैत का बयान
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन को लेकर कहा कि जैसे राजा अपने जन्मदिन पर दौलत लुटाते हैं, वैसे ही किसानों के लिए भी खजाने का मुंह खोलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कृषि मसौदे को रद्द किया जाए, अन्यथा फसल और नस्ल बचाने के लिए बड़ा आंदोलन होगा।
नरेश टिकैत की मांग
राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि इस बार गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल से कम स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाकियू ने सरकार को जगाने की शुरुआत कर दी है और देशभर में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित होंगे।
अन्य नेताओं की भागीदारी
- उत्तराखंड के खानपुर विधायक उमेश शर्मा ने कहा कि राज्य में किसानों के हितों के लिए भाकियू के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
- गठवाला खाप के थांबेदार श्याम सिंह मलिक ने कहा कि सभी खाप चौधरी और थांबेदार किसान हितों की लड़ाई के लिए तैयार हैं।
- पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
किसानों की 16 प्रमुख मांगें
- फसलों का लाभकारी मूल्य एवं प्रभावी खरीद व्यवस्था
- गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल और समयबद्ध भुगतान
- बिजली समस्या का स्थायी समाधान
- डीएपी, यूरिया और खाद की पर्याप्त उपलब्धता
- आवारा पशुओं से किसानों को मुक्ति
- प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का तत्काल मुआवजा
- फसल बीमा का लाभ वास्तविक नुकसान के आधार पर मिले
- सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया जाए
- कृषि ऋण से संबंधित समस्याओं पर राहत
- मंडियों में शोषण रोका जाए
- किसानों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
- भूमि अधिग्रहण में किसानों के हित की रक्षा
- किसानों पर दर्ज मुकदमे की समीक्षा
- कृषि लागत पर नियंत्रण
- किसान संगठनों से संवाद नियमित रूप से हो
- सोलानी नदी पर बांध और पुरकाजी को तहसील का दर्जा दिया जाए
मुजफ्फरनगर की इस महापंचायत ने किसानों की आवाज को एक बार फिर बुलंद किया। राकेश टिकैत और नरेश टिकैत ने साफ कर दिया कि जब तक किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।









