नेपाल में बाढ़ का कहर: 788 मौतें, 2500 से अधिक लोग लापता

आपदा का भयावह रूप

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने अब तक 788 से अधिक लोगों की जान ले ली है। नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, लगभग 2,500 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, 9,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

इस आपदा की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा पर हिमस्खलन और चट्टानों के गिरने से हुई, जिसने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया। भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी निचले इलाकों में फैल गया, जिससे घर, सड़कें, पुल और पनबिजली परियोजनाएं बह गईं।

    अंतरराष्ट्रीय असर

    इस बाढ़ का असर चीन तक पहुंचा। तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई और लगभग 550 लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में लापता लोगों में 591 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनमें भारत, अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और अन्य देशों के पर्यटक शामिल हैं।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि 275 भारतीय और भारतीय मूल के 128 लोग लापता हैं। अब तक 149 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है।

    बचाव और राहत कार्य

    रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। सेना, पुलिस और स्थानीय बचाव दल प्रभावित इलाकों में काम कर रहे हैं। हालांकि, भोटेकोशी नदी में जलस्तर फिर से बढ़ने की चेतावनी दी गई है, जिससे बचाव कार्य और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

    अस्पतालों में मृतकों की पहचान करने का काम जारी है। अब तक मिले शवों में से केवल 17 की पहचान हो पाई है। कई शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण पहचानना मुश्किल हो रहा है। DNA नमूने लेकर शवों को सुरक्षित रखा जा रहा है।

      मानवीय संकट

      बाढ़ से बचे लोग अब अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। हजारों लोग अपने प्रियजनों से अलग हो गए हैं और भविष्य को लेकर अनिश्चितता में हैं। राहत शिविरों में भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है।