मेरठ के एक्सिस बैंक करेंसी चेस्ट में मिले 4.63 लाख रुपये के जाली नोट, 13 महीने की जांच में सामने आया मामला

मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बैंकिंग व्यवस्था के जरिए नकली नोटों के करेंसी चेस्ट तक पहुंचने का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और नकदी जांच प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मेरठ के मंगलपांडे नगर स्थित एक्सिस बैंक के करेंसी चेस्ट में जांच के दौरान कुल 4 लाख 63 हजार 650 रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने की जानकारी सामने आई है। बैंक की ओर से शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस करेंसी चेस्ट से एक्सिस बैंक की करीब 186 शाखाएं जुड़ी हुई हैं। इन शाखाओं में ग्राहकों और अन्य माध्यमों से जमा होने वाली नकदी को जांच और मिलान की प्रक्रिया के लिए करेंसी चेस्ट भेजा जाता है। इसी नकदी की जांच के दौरान अलग-अलग मूल्यवर्ग के जाली नोट सामने आए।

13 महीने की नकदी की जांच के बाद सामने आया मामला

मामले की शिकायत एक्सिस बैंक करेंसी चेस्ट के प्रबंधक सरताज सिंह, निवासी हिसार, हरियाणा द्वारा मेरठ के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति से की गई है।

शिकायत के अनुसार, करेंसी चेस्ट में विभिन्न बैंक शाखाओं से पहुंचने वाली नकदी की जांच के दौरान नकली नोटों की पहचान हुई। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने पुराने रिकॉर्ड और जमा नकदी की विस्तृत जांच शुरू की।

बैंक स्तर पर 1 दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक यानी करीब 13 महीने की अवधि में करेंसी चेस्ट में जमा हुई नकदी की जांच की गई। इस प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग मूल्यवर्ग के कई जाली नोट बरामद होने की बात सामने आई।

1323 जाली नोट, कुल कीमत 4,63,650 रुपये

बैंक की जांच में कुल 1323 जाली नोट मिलने की जानकारी सामने आई है। इन सभी नोटों का कुल मूल्य 4 लाख 63 हजार 650 रुपये बताया गया है।

उपलब्ध विवरण के अनुसार जाली नोटों में—

  • 500 रुपये के 805 नोट
  • 200 रुपये के 142 नोट
  • 100 रुपये के 279 नोट
  • 50 रुपये के 97 नोट

शामिल हैं।

जांच में कुछ पुराने नोट भी मिले हैं। वहीं कुछ ऐसे नोटों की भी जानकारी सामने आई है, जो दो हिस्सों में कटे हुए थे और बाद में उन्हें चिपकाकर जोड़ने का प्रयास किया गया था।

सबसे बड़ा सवाल—जाली नोट किस शाखा से पहुंचे?

मामले में पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में जाली नोट आखिर किस शाखा से होते हुए करेंसी चेस्ट तक पहुंचे।

चूंकि मंगलपांडे नगर स्थित करेंसी चेस्ट से करीब 186 शाखाओं का लेनदेन जुड़ा बताया जा रहा है, इसलिए जांच का दायरा भी बड़ा है। पुलिस और बैंक अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जिन शाखाओं से नकदी भेजी गई थी, वहां उसकी जांच किस स्तर पर हुई थी और नकली नोटों की पहचान क्यों नहीं हो सकी।

जांच में संबंधित शाखाओं के नकदी जमा रिकॉर्ड, करेंसी चेस्ट में भेजी गई रकम, कैश मिलान और अन्य बैंकिंग दस्तावेजों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

बैंकिंग व्यवस्था में ग्राहकों या शाखाओं से प्राप्त नकदी की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं होती हैं। इसके बावजूद यदि बड़ी संख्या में जाली नोट करेंसी चेस्ट तक पहुंच गए, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि नकदी की जांच के दौरान इन नोटों की पहचान क्यों नहीं हुई।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मामले में किसी बैंक कर्मचारी की भूमिका रही है या नहीं। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी कर्मचारी की संलिप्तता के संबंध में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि मामला सिर्फ जांच में हुई लापरवाही का है या नकली नोटों को बैंकिंग चैनल के जरिए आगे पहुंचाने की कोई संगठित कोशिश भी हुई।

नकली नोटों के स्रोत तक पहुंचना पुलिस के लिए अहम

मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस को यह पता लगाना होगा कि जाली नोट सबसे पहले किस स्थान या माध्यम से नकदी व्यवस्था में शामिल हुए। इसके बाद यह भी जांच का विषय होगा कि वे किस शाखा में जमा हुए और वहां से किस प्रक्रिया के तहत करेंसी चेस्ट तक पहुंचे।

यदि नकली नोट अलग-अलग शाखाओं से आए हैं तो जांच में प्रत्येक शाखा के नकदी रिकॉर्ड और संबंधित अवधि के लेनदेन की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है। वहीं यदि नोट किसी सीमित स्रोत से जुड़े पाए जाते हैं तो पुलिस के लिए उनके नेटवर्क तक पहुंचना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नकली करेंसी को लेकर बढ़ी चिंता

मेरठ में सामने आया यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बैंकिंग चैनल में नकली करेंसी पहुंचने को लेकर पहले भी मामले सामने आ चुके हैं। इससे बैंकिंग संस्थानों में नकदी की जांच और जाली नोटों की पहचान की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

हालांकि, मेरठ के मामले में नकली नोटों का स्रोत और उन्हें बैंक तक पहुंचाने वाले व्यक्ति या समूह के बारे में अभी अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह मामला मानवीय लापरवाही से जुड़ा है, किसी व्यवस्थित तरीके से नकदी जमा कराने से या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

आम लोगों के लिए भी गंभीर सवाल

इस मामले ने आम लोगों के सामने भी एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है। यदि बड़ी संख्या में नकली नोट बैंकिंग प्रणाली के उस हिस्से तक पहुंच सकते हैं जहां नकदी की जांच की जाती है, तो सामान्य बाजार में नकली नोटों की पहचान और उन्हें रोकने की चुनौती और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालांकि, इस मामले के आधार पर अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कोई नया संगठित नकली करेंसी नेटवर्क सक्रिय है। इसका पता पुलिस की विस्तृत जांच, बैंक रिकॉर्ड की पड़ताल और नकली नोटों के स्रोत की पहचान के बाद ही चल सकेगा।

पुलिस जांच से खुलेगा पूरा राज

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और संबंधित बैंक शाखाओं से आवश्यक रिकॉर्ड एवं दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। जांच का मुख्य फोकस जाली नोटों के स्रोत, संबंधित शाखा, नकदी जांच की प्रक्रिया और करेंसी चेस्ट तक नोटों के पहुंचने के पूरे क्रम को समझने पर है।

अब सबसे अहम सवाल यही है कि 4.63 लाख रुपये के ये जाली नोट बैंकिंग सिस्टम में कहां से आए और 13 महीने तक चलने वाली नकदी प्रक्रिया के दौरान इनकी पहचान कैसे नहीं हो सकी। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले में जिम्मेदारी और नकली नोटों के वास्तविक स्रोत को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

Image Source – Prabhat Khabr