प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री – धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिली अतिरिक्त जिम्मेदारी
केंद्र सरकार ने कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। यह निर्णय धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लिया गया है और जोशी अब अंतरिम शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे।
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। इससे पहले वे संसदीय कार्य मंत्री और कोयला एवं खनन मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे थे। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह जिम्मेदारी उन्हें अंतरिम रूप से दी गई है।
प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक सफर
- जोशी कर्नाटक से आते हैं और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।
- वे लंबे समय से संसदीय कार्य मंत्री के रूप में सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की अहम कड़ी रहे हैं।
- खनन और कोयला मंत्रालय में उनके कार्यकाल के दौरान कई सुधारात्मक कदम उठाए गए।
🎓 शिक्षा मंत्रालय की नई जिम्मेदारी
- शिक्षा मंत्रालय का प्रभार संभालते ही जोशी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और तकनीकी सुधार उनकी प्राथमिकता होगी।
- हाल ही में हुए NEET पेपर लीक विवाद के बाद उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार तकनीक-आधारित परीक्षाओं को लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
- उन्होंने कहा कि अगले वर्ष से कंप्यूटर-आधारित परीक्षाएं लागू करने की योजना है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकी जा सके।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
- धर्मेंद्र प्रधान ने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया।
- उनके कार्यकाल में शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन और कई बड़े सुधारात्मक कदम उठाए गए थे।
महत्व और असर
- जोशी का शिक्षा मंत्रालय में आना सरकार की गंभीरता को दर्शाता है कि परीक्षा प्रणाली और शिक्षा सुधारों को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
- छात्रों और अभिभावकों के बीच विश्वास बहाल करने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।
- शिक्षा मंत्रालय में तकनीकी सुधारों और पारदर्शिता को बढ़ावा देने से आने वाले वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत होगी।









