दिल्ली पुलिस की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया पर फेक पोस्ट और पाकिस्तान से जुड़े अकाउंट्स को लेकर बड़ा दावा


CJP Protest को लेकर दिल्ली पुलिस ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे फेक वीडियो, डीपफेक, झूठे दावों और पाकिस्तान से संचालित अकाउंट्स पर बड़ा खुलासा किया। जानिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की पूरी जानकारी।


नई दिल्ली। जंतर मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने पहली बार आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों, फर्जी वीडियो और भ्रामक दावों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो और पोस्ट तथ्यात्मक रूप से गलत पाए गए हैं और कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली पुलिस के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी सही नहीं होती। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी पोस्ट, वीडियो या संदेश पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें और न ही उसे आगे साझा करें।


सोशल मीडिया पर फेक नैरेटिव फैलाने की कोशिश

दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से इंस्टाग्राम और अन्य माध्यमों पर बड़ी संख्या में ऐसे वीडियो और पोस्ट साझा किए गए जिनका उद्देश्य लोगों के बीच भ्रम और डर का माहौल पैदा करना था।

डीसीपी ने कहा कि जांच में कई ऐसे पोस्ट सामने आए हैं जिनमें तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया या पूरी तरह से गलत जानकारी साझा की गई।

उनके मुताबिक, कुछ पोस्ट का उद्देश्य केवल लोगों को गुमराह करना नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर अनावश्यक घबराहट फैलाना भी था।


20 जुलाई की घटना को लेकर झूठा दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली पुलिस ने एक वायरल पोस्ट का उदाहरण भी दिया।

पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि 20 जुलाई को हुई एक घटना में एक लड़की की मौत हो गई थी। हालांकि जांच में यह दावा पूरी तरह गलत पाया गया।

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस तरह के भ्रामक दावों का वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं था और इन्हें बिना पुष्टि के वायरल किया गया।


‘रात में कार्रवाई’ के दावे को भी बताया भ्रामक

डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि एक राजनीतिक नेता द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर यह दावा किया गया कि केंद्र सरकार रात के समय प्रदर्शनकारियों पर बड़ी कार्रवाई या क्रैकडाउन करने की तैयारी कर रही है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस दावे की भी जांच की गई और इसे भ्रामक पाया गया। पुलिस के अनुसार, ऐसे दावे लोगों में भय और अस्थिरता पैदा कर सकते हैं।


पाकिस्तान से संचालित अकाउंट्स पर बड़ा दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स, जिन्हें पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा है, प्रदर्शन से संबंधित झूठी और भ्रामक सामग्री प्रसारित कर रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक तकनीकी विश्लेषण में ऐसे कई अकाउंट्स की गतिविधियां सामने आई हैं जो लगातार गलत जानकारी साझा कर रहे थे।

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि इसी तरह के कुछ हैंडल पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सक्रिय पाए गए थे और उस समय भी कथित रूप से फर्जी सूचनाएं प्रसारित कर रहे थे।

हालांकि पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन अकाउंट्स के नाम या तकनीकी जांच से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की।


सोनम वांगचुक का कथित फेक वीडियो

दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक और मामले का उल्लेख किया जिसमें समाजसेवी सोनम वांगचुक का कथित रूप से एडिट किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।

पुलिस के अनुसार, वीडियो में ऐसा प्रतीत कराया गया कि वह कुछ और बोल रहे हैं, जबकि ऑडियो और वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर अलग संदेश प्रस्तुत किया गया।

अधिकारियों का कहना है कि ऐसे वीडियो लोगों को भ्रमित करने के लिए तैयार किए जाते हैं और इन्हें गंभीरता से जांचा जा रहा है।


डीपफेक वीडियो से सेना की तैनाती का दावा

दिल्ली पुलिस ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर एक डीपफेक वीडियो वायरल किया गया, जिसमें दावा किया गया कि जंतर मंतर पर भारतीय सेना को तैनात किया गया है।

पुलिस ने इस दावे को पूरी तरह निराधार बताया।

अधिकारियों ने कहा कि आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर वीडियो और ऑडियो के साथ छेड़छाड़ की जा रही है, जिससे आम लोगों के लिए वास्तविक और नकली सामग्री में अंतर करना कठिन हो सकता है।


STF का गठन

फर्जी पोस्ट, डीपफेक वीडियो और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों की निगरानी के लिए दिल्ली पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है।

पुलिस के अनुसार, यह विशेष टीम निम्नलिखित कार्यों पर ध्यान देगी—

  • सोशल मीडिया की 24 घंटे निगरानी।
  • वायरल पोस्ट की तथ्यात्मक जांच।
  • फेक वीडियो और डीपफेक सामग्री की पहचान।
  • कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाले अकाउंट्स की जांच।
  • जरूरत पड़ने पर संबंधित कानूनी कार्रवाई।

दिल्ली पुलिस की जनता से अपील

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी वायरल पोस्ट या वीडियो पर तुरंत विश्वास न करें।

पुलिस ने लोगों से आग्रह किया कि—

  • केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें।
  • किसी भी अपुष्ट वीडियो या संदेश को आगे साझा न करें।
  • अफवाह फैलाने वाली सामग्री की सूचना संबंधित एजेंसियों को दें।
  • सोशल मीडिया का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करें।

CJP का प्रदर्शन जारी

जंतर मंतर पर CJP का प्रदर्शन पिछले कई दिनों से जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार से बातचीत और समाधान की मांग कर रहे हैं।

हाल ही में CJP के प्रतिनिधिमंडल की वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी हुई थी, जिसके बाद राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। हालांकि प्रदर्शन अभी भी जारी है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।


प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें

  • दिल्ली पुलिस ने CJP प्रदर्शन पर पहली आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
  • सोशल मीडिया पर फेक वीडियो और भ्रामक पोस्ट फैलाए जाने का दावा किया।
  • इंस्टाग्राम सहित कई प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाओं के प्रसार की बात कही।
  • 20 जुलाई की घटना में लड़की की मौत का वायरल दावा गलत बताया।
  • कथित रात के क्रैकडाउन संबंधी दावे को भ्रामक बताया।
  • पाकिस्तान से संचालित कुछ अकाउंट्स द्वारा फर्जी पोस्ट फैलाने का आरोप लगाया।
  • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सक्रिय रहे कुछ हैंडल्स का भी उल्लेख किया।
  • सोनम वांगचुक का कथित एडिटेड वीडियो वायरल होने की जानकारी दी।
  • डीपफेक वीडियो के जरिए सेना की तैनाती का झूठा दावा फैलाने की बात कही।
  • सोशल मीडिया निगरानी के लिए STF का गठन किया गया।
  • नागरिकों से केवल सत्यापित जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई।

दिल्ली पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य प्रदर्शन से जुड़ी अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करना था। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही अपुष्ट और फर्जी सामग्री कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। इसलिए नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी वायरल पोस्ट या वीडियो को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें। साथ ही, पुलिस ने संकेत दिया है कि फेक न्यूज, डीपफेक और भ्रामक प्रचार करने वालों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।