बिजनौर में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं की न्याय यात्रा, बैरिकेडिंग हटाकर कलेक्ट्रेट पहुंचे वकील
50 साल पुरानी मांग को जन आंदोलन बनाने का आह्वान, ‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ के नारे से गूंजा प्रदर्शन
बिजनौर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर बुधवार को बिजनौर में अधिवक्ताओं ने न्याय यात्रा निकालकर अपनी आवाज बुलंद की। जिला जजी से शुरू हुई इस यात्रा में सैकड़ों अधिवक्ता शामिल हुए। नुमाइश ग्राउंड के पास पुलिस द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग को लेकर अधिवक्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद अधिवक्ता बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़े और कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की।
जिला जजी से कलेक्ट्रेट तक निकाली न्याय यात्रा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर बुधवार दोपहर करीब एक बजे अधिवक्ताओं ने जिला जजी परिसर से न्याय यात्रा शुरू की। यात्रा में बड़ी संख्या में वकील शामिल हुए। अधिवक्ता नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। रास्ते में पुलिस ने नुमाइश ग्राउंड सहित कई स्थानों पर बैरिकेडिंग लगाकर मार्ग रोकने का प्रयास किया।

बैरिकेडिंग के पास पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच काफी देर तक बहस हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने बैरिकेडिंग हटाई और आगे बढ़ते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग दोहराई।
पांच दशक से जारी है बेंच की मांग
अधिवक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग करीब 50 वर्षों से उठाई जा रही है। लंबे समय से चली आ रही इस मांग को अब व्यापक जनसमर्थन से जोड़ने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि यह केवल वकीलों का मुद्दा नहीं, बल्कि आम नागरिकों को सुलभ, किफायती और समयबद्ध न्याय दिलाने से जुड़ा विषय है।
अधिवक्ताओं के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को हाईकोर्ट से संबंधित मामलों की पैरवी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे समय और धन दोनों खर्च होते हैं। क्षेत्र में हाईकोर्ट बेंच स्थापित होने से वादकारियों को आवागमन में होने वाली परेशानियों से राहत मिल सकती है और न्यायिक प्रक्रिया तक उनकी पहुंच आसान हो सकती है।
मुकदमों के बोझ और न्याय में देरी का उठाया मुद्दा
न्याय यात्रा में शामिल अधिवक्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों और न्याय मिलने में होने वाली देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेंच की स्थापना से क्षेत्र के लोगों को अपने मुकदमों की पैरवी के लिए अधिक सुविधाजनक विकल्प मिल सकता है।
अधिवक्ताओं ने इस मांग को नागरिकों के न्याय पाने के अधिकार से जुड़ा बताते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से ठोस पहल करने की अपील की। उनका कहना था कि क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग पर अब गंभीरता से विचार कर निर्णय लिया जाना चाहिए।
‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ का नारा
न्याय यात्रा के दौरान अधिवक्ताओं ने ‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लगाकर अपनी मांग को राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में लाने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के मुद्दे पर अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाया जाता रहेगा। न्याय यात्रा के माध्यम से उन्होंने आम जनता को भी इस मांग से जुड़ने का संदेश दिया।
बड़ी संख्या में अधिवक्ता रहे शामिल
न्याय यात्रा में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह एडवोकेट सहित सत्यपाल सिंह, एडवोकेट फैसल खान, अरशद एडवोकेट, आसिफ हुसैन, मौ. शादाब, मुकुल, मोंटी, हरपाल सिंह, अहमद जकावत, अजमल खान, आकांक्षा, नैना और संगीता सहित अनेक अधिवक्ता शामिल रहे।
अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए संबंधित सरकारों तक उनकी मांग पहुंचाने की अपील की। अब इस मुद्दे पर सरकार की ओर से होने वाली पहल पर क्षेत्र के अधिवक्ताओं और वादकारियों की नजर रहेगी।









