हरिद्वार में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी पर सवाल, बेकरियों और होटलों की जांच की मांग…

नरेश गुप्ता की रिपोर्ट

हरिद्वार में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी पर उठे सवाल, बड़ी बेकरियों और होटलों की जांच कब?

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से नकली पनीर, दूध, एक्सपायरी डेट की कोल्ड ड्रिंक और अन्य खाद्य पदार्थों के खिलाफ छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है। विभाग ने हाल ही में बड़ी मात्रा में पनीर पकड़कर नष्ट भी कराया है। इसके बावजूद शहर में संचालित सैकड़ों बेकरियों, मिठाई की दुकानों, होटलों, भोजनालयों और सड़क किनारे खाद्य पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग की कार्रवाई मुख्य रूप से छोटे कारोबारियों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि बड़े प्रतिष्ठानों की नियमित और व्यापक जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

खाद्य सुरक्षा विभाग उत्तराखंड के खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय के आदेश और हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर जनपद में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए अभियान चला रहा है। इस दौरान दुकानों पर छापेमारी के साथ सड़क पर चलते टैंकरों और छोटे मालवाहक वाहनों की भी जांच की जा रही है। ऐसे वाहनों में ले जाए जा रहे दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की जांच के साथ नकली पनीर पकड़ने की कार्रवाई भी की गई है। हालांकि, खाद्य सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब यह मांग भी सामने आ रही है कि विभाग बड़े खाद्य कारोबारियों, बेकरियों और होटलों की जांच का दायरा बढ़ाए।

हरिद्वार में सैकड़ों बेकरियां, कारोबार और जांच की स्थिति पर सवाल

हरिद्वार शहर में बड़ी संख्या में बेकरियां संचालित होने का दावा किया जा रहा है। अनुमान के मुताबिक, शहर में 300 से अधिक बेकरियां हो सकती हैं। इनमें कुछ बड़े प्रतिष्ठान हैं, जबकि गली-मोहल्लों में अनेक छोटी बेकरियां भी चल रही हैं। हालांकि, शहर में वास्तव में कितनी बेकरियां संचालित हैं, कितनों के पास वैध खाद्य लाइसेंस है और कितने प्रतिष्ठानों की नियमित जांच होती है, इस संबंध में आधिकारिक आंकड़े सामने आना जरूरी है।

बेकरियों में बिस्कुट, नमकीन, केक और अन्य खाद्य सामग्री तैयार की जाती है। बाजार में कुछ बिस्कुट एक हजार से दो हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक की कीमत पर बेचे जाने का उल्लेख किया जा रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि इन उत्पादों को तैयार करने में किस प्रकार का आटा, घी, मक्खन, तेल और अन्य सामग्री इस्तेमाल की जाती है तथा निर्माण के दौरान निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।

महंगे खाद्य उत्पादों की बिक्री अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन उत्पादों की गुणवत्ता, सामग्री की शुद्धता, निर्माण की स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की जांच विभाग की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

खाद्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देशों का कितना हो रहा पालन?

विनय शंकर पांडेय,आईएएस

खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय के निर्देश हैं कि खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों में जांच की जाए और अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशों के तहत भी जनपद में छापेमारी अभियान चलाए जाने की बात कही गई है।

ऐसे में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अभियान के तहत कितने प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया, कितने नमूने लिए गए, कितने मामलों में मिलावट या अन्य कमियां सामने आईं और कितने कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हुई। इन आंकड़ों के सार्वजनिक होने से विभागीय कार्रवाई की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सकेगा।

इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि शहर में संचालित कुल बेकरियों, होटलों, मिठाई की दुकानों, भोजनालयों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की संख्या कितनी है तथा उनमें से कितने वैध लाइसेंस या पंजीकरण के तहत कारोबार कर रहे हैं।

दूध कारोबारियों, हलवाइयों और खाद्य विक्रेताओं ने भी खोलीं बेकरियां

सवाल यह भी है कि दूध का कारोबार करने वाले कई लोगों, खाद्य सामग्री बेचने वाले व्यापारियों और हलवाइयों ने भी बेकरी का काम शुरू कर दिया है। इनमें से कुछ प्रतिष्ठानों पर नमकीन सहित कई तरह के खाद्य उत्पाद तैयार किए जाने की बात कही गई है।

ऐसे में यह जांचना जरूरी है कि इन प्रतिष्ठानों में खाद्य सामग्री किस गुणवत्ता के तेल, बेसन, आटे और अन्य कच्चे माल से तैयार की जाती है। इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चे माल की गुणवत्ता, भंडारण, निर्माण स्थल की स्वच्छता और तैयार उत्पादों की सुरक्षित पैकेजिंग उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से सीधे जुड़े विषय हैं।

हालांकि, यह मान लेना उचित नहीं होगा कि सभी बेकरियां या खाद्य कारोबार करने वाले प्रतिष्ठान नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि विभाग बिना किसी भेदभाव के सभी श्रेणियों के प्रतिष्ठानों की जोखिम के आधार पर जांच करे और जहां अनियमितता मिले, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

मिठाई की दुकानों और होटलों की जांच भी जरूरी

हरिद्वार में छोटी-बड़ी मिठाई की दुकानों के साथ बड़ी संख्या में होटल और भोजनालय भी संचालित हैं। यहां प्रतिदिन स्थानीय लोगों के अलावा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी भोजन करते हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करना विशेष महत्व रखता है।

शहर के कुछ प्रतिष्ठानों में महंगी मिठाइयां और बेकरी उत्पाद तैयार किए जाने या बाहर से मंगाकर बेचे जाने की बात भी उठाई गई है। यदि किसी प्रतिष्ठान में मिठाई और बेकरी का सामान दूसरे राज्य में तैयार होता है, तो उसकी आपूर्ति, निर्माण स्थल, लाइसेंस और खाद्य सुरक्षा संबंधी दस्तावेजों की जांच के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय जरूरी है।

एक बड़े मिठाई प्रतिष्ठान का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि वहां बिकने वाली मिठाई और बेकरी सामग्री उत्तर प्रदेश से तैयार होकर आता है। यहां तो इनकी मिठाइयां और बेकरी का सामान बिकता है, इनकी बेकरी के समान को देखने के लिए और मिठाई को बनते हुए देखने के लिए उत्तर प्रदेश जाना पड़ेगा उत्तर प्रदेश कौन जाए लियाजा काम जैसे चल रहा है चलने दो।

गली-मोहल्लों में बिकने वाले कबाब और टिक्कों की गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की मांग

हरिद्वार के विभिन्न इलाकों में शाम के समय सड़क किनारे कबाब, टिक्का और अन्य खाद्य पदार्थ बेचने वाले ठेलों तथा दुकानों पर भीड़ दिखाई देती है। इन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री और निर्माण प्रक्रिया की जांच को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

खाद्य सुरक्षा के लिहाज से यह देखना जरूरी है कि इन दुकानों पर इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल सुरक्षित है या नहीं, खाद्य पदार्थ स्वच्छ परिस्थितियों में तैयार किए जा रहे हैं या नहीं और विक्रेता आवश्यक पंजीकरण अथवा लाइसेंस रखते हैं या नहीं। शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के लिए उचित भंडारण, स्वच्छ उपकरणों तथा सुरक्षित पकाने की प्रक्रिया का पालन भी महत्वपूर्ण है।

इन सभी विक्रेताओं के खिलाफ बिना जांच किसी प्रकार का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। हालांकि, नियमित निरीक्षण और पारदर्शी कार्रवाई से उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाया जा सकता है।

तीन पूरियों की कीमत 200 रुपये, इस्तेमाल होने वाले घी की जांच पर सवाल

हरिद्वार के एक नामी होटल का उदाहरण देते हुए दावा किया गया है कि वहां देसी घी की तीन पूरियां 200 रुपये में बेची जाती हैं। इस कीमत को लेकर सवाल उठाते हुए घी की गुणवत्ता और इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की जांच की आवश्यकता बताई गई है।

हालांकि, किसी खाद्य पदार्थ की ऊंची कीमत अपने आप में मिलावट या अनियमितता का प्रमाण नहीं है। असली सवाल यह है कि जिस सामग्री का इस्तेमाल करने का दावा किया जा रहा है, वह वास्तव में वही है या नहीं और क्या प्रतिष्ठान खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन कर रहा है।

यदि किसी प्रतिष्ठान में देसी घी के नाम पर अन्य वसा का इस्तेमाल किए जाने की शिकायत मिलती है, तो खाद्य सुरक्षा विभाग नमूना लेकर उसकी प्रयोगशाला में जांच करा सकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित मामले में उचित निष्कर्ष और कार्रवाई की जानी चाहिए।

सैंपल की रिपोर्ट आने में देरी को लेकर भी चिंता

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए नमूने लेना विभागीय कार्रवाई का अहम हिस्सा है। लेकिन सवाल है कि नमूने लेने के बाद उनकी रिपोर्ट आने में कितना समय लगता है और यदि किसी उत्पाद में कमी पाई जाती है, तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ किस स्तर की कार्रवाई होती है।

खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच और रिपोर्ट की समयसीमा संबंधित प्रक्रिया, परीक्षण और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसलिए यह जरूरी है कि विभाग नमूना लेने की तारीख, प्रयोगशाला की रिपोर्ट और उसके बाद की गई कार्रवाई के बारे में पारदर्शिता रखे।

यदि किसी उत्पाद में मिलावट या अन्य गंभीर अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। केवल मामूली जुर्माने तक सीमित रहने के आरोपों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए विभाग के कार्रवाई संबंधी रिकॉर्ड और मामलों के परिणामों की समीक्षा आवश्यक है।

स्टाफ की कमी के कारण जांच प्रभावित होने की आशंका

खाद्य सुरक्षा विभाग में कर्मचारियों की कमी की आशंका भी है। सवाल है कि यदि शहर में बड़ी संख्या में बेकरियां, होटल, भोजनालय, मिठाई की दुकानें और अन्य खाद्य प्रतिष्ठान हैं, तो सीमित कर्मचारियों के सहारे सभी की नियमित जांच कैसे संभव हो पाती है।

खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए विभाग के पास कारोबारियों और प्रतिष्ठानों का अद्यतन रिकॉर्ड होना चाहिए। इसके साथ ही खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण, निरीक्षण की स्थिति, लिए गए नमूनों, प्रयोगशाला रिपोर्ट तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण भी उपलब्ध होना चाहिए।

यदि विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं, तो शासन स्तर पर इस समस्या का समाधान किया जाना जरूरी है। वहीं, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए जोखिम आधारित निरीक्षण और प्राथमिकता तय करने की व्यवस्था भी उपयोगी हो सकती है।

रिश्वत के मामले में पकड़े गए अधिकारी को लेकर भी आरोप

खाद्य विभाग में शायद स्टाफ की इतनी कमी है कि एक साहब तो जो खाद्य विभाग हरिद्वार में ही मौजूद हैं , रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे छूट गए फिर हरिद्वार में आकर तैनात हो गए हैं।

खाद्य लाइसेंस, सरकारी फीस और मानकों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग

खाद्य कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए लागू लाइसेंस और पंजीकरण संबंधी नियम कारोबार की प्रकृति, आकार तथा अन्य निर्धारित मानकों पर निर्भर करते हैं। ऐसे में हरिद्वार में बेकरियों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों को यह जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है कि उन्हें किस श्रेणी में लाइसेंस या पंजीकरण कराना होगा, सरकारी फीस कितनी है और कारोबार चलाने के लिए किन मानकों का पालन करना आवश्यक है।

उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों के हित में यह जानकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट, सूचना पट्ट या जागरूकता अभियान के माध्यम से सार्वजनिक की जा सकती है। इससे वैध कारोबारियों को नियमों की जानकारी मिलेगी और बिना पंजीकरण या मानकों का उल्लंघन कर कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों की पहचान करने में भी मदद मिलेगी।

दीपावली या विशेष त्योहारों पर ही नहीं, नियमित रूप से होनी चाहिए निगरानी

हरिद्वार में खाद्य सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह जरूरी है कि जांच केवल विशेष त्योहारों या छापेमारी अभियानों तक सीमित न रहे। मिठाई, दूध, पनीर, बिस्कुट, नमकीन, होटल के भोजन और सड़क किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर पूरे साल नजर रखी जानी चाहिए।

खाद्य सुरक्षा विभाग को बड़े और छोटे सभी प्रतिष्ठानों के लिए समान नियमों के तहत निरीक्षण करना चाहिए। जहां शिकायत मिले, वहां समयबद्ध जांच होनी चाहिए और नमूना रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

हरिद्वार एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन नगरी है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक भोजन तथा अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते हैं। ऐसे में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना प्रशासन, खाद्य सुरक्षा विभाग और कारोबारियों की साझा जिम्मेदारी है।

अब देखना यह होगा कि खाद्य सुरक्षा विभाग पहले से चल रहे छापेमारी अभियान के साथ बेकरियों, होटलों, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच को किस तरह व्यापक बनाता है तथा खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या कदम उठाता है।