रेखा आर्य प्रकरण पर करण माहरा का हमला, बोले- जब कैबिनेट मंत्री ही असुरक्षित तो आम महिलाओं की सुरक्षा कैसे होगी?
अंकिता भंडारी मामले का जिक्र कर कांग्रेस नेता ने भाजपा सरकार को घेरा; महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल, पूछा- आखिर कितनी अंकिता, पिंकी और सल्ट-उत्तरकाशी की बेटियों के मामले सामने आएंगे?
देहरादून। उत्तराखंड में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़े प्रकरण के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मंत्री रेखा आर्य की ओर से अपने पति गिरधारी लाल साहू पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस मामले को प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए सवाल किया कि जब राज्य सरकार में शामिल एक कैबिनेट मंत्री ही खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं, तो आम महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
करण माहरा ने इस प्रकरण के बहाने प्रदेश में महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और महिलाओं को न्याय मिलने से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। यदि सत्ता में महत्वपूर्ण पद पर बैठी महिला को भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है, तो प्रदेश की अन्य महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
अंकिता भंडारी मामले का जिक्र कर सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता करण माहरा ने उत्तराखंड में चर्चित अंकिता भंडारी मामले का संदर्भ देते हुए भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराधों और संवेदनशील मामलों को लेकर सरकार की जवाबदेही पर जोर दिया। माहरा ने अंकिता, पिंकी और सल्ट-उत्तरकाशी की बेटियों से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि आखिर प्रदेश में महिलाओं से जुड़े ऐसे कितने मामले सामने आने के बाद सरकार गंभीरता से कदम उठाएगी?
उनके बयान का मुख्य संदेश यह रहा कि महिला सुरक्षा को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसके लिए प्रभावी कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।
महिला सुरक्षा पर सरकार की जवाबदेही का सवाल
रेखा आर्य प्रकरण को लेकर करण माहरा ने भाजपा सरकार को घेरते हुए महिला सुरक्षा के मुद्दे पर जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। उनके अनुसार, महिलाओं की सुरक्षा का भरोसा कायम रखना किसी भी सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए जरूरी है कि महिलाओं से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस मामले ने एक बार फिर उत्तराखंड में महिला सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। कांग्रेस जहां इस प्रकरण के जरिए भाजपा सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है, वहीं मामले से जुड़े आरोपों और तथ्यों की निष्पक्ष जांच के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।










