राहुल गांधी की SIR याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर रोक लगाने की मांग

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से निर्वाचन आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। यह मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ा है। याचिका पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई करेगी।

विपक्षी नेताओं ने याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और अनियमितताओं की आशंका जताई है। उन्होंने इस प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने के साथ मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट इन मांगों पर विचार कर सकता है। हालांकि, याचिका में उठाए गए आरोपों पर अदालत का अंतिम रुख सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

14 तकनीकी खामियों के कारण पहले टल गई थी सुनवाई

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं ने सोमवार, 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना थी, लेकिन अदालत की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 प्रक्रियागत कमियां चिह्नित की थीं। इसके चलते याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से पहले खामियां दूर करने को कहा गया था।

रजिस्ट्री की ओर से बताई गई कमियों में प्रतिवादियों के नाम से संबंधित त्रुटियां, कुछ निजी पक्षकारों को प्रतिवादी बनाए जाने के संबंध में स्पष्टीकरण का अभाव और पुराने न्यायिक फैसले की प्रति संलग्न नहीं होना शामिल था। इसके अलावा, 11 याचिकाकर्ताओं में से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को छोड़कर अन्य नौ नेताओं की ओर से वकालतनामा दाखिल नहीं किए जाने की बात भी सामने आई थी।

मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की प्रति स्पष्ट नहीं होने, निर्धारित कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी और दस्तावेजों की छपाई से जुड़ी कुछ अन्य त्रुटियों का भी उल्लेख किया गया था। इन प्रक्रियागत कमियों को दूर करने के बाद मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने का रास्ता साफ हुआ।

याचिका में राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेता शामिल

इस मामले में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों के प्रमुख नेता याचिकाकर्ता हैं। इनमें तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संजय राउत, माकपा के एम.ए. बेबी, भाकपा के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई.टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं।

इस याचिका में आम आदमी पार्टी के किसी नेता का नाम याचिकाकर्ता के रूप में शामिल नहीं है। वहीं, निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को प्रतिवादी बनाया गया है।

SIR प्रक्रिया पर विपक्ष ने क्यों उठाए सवाल?

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा और सत्यापन की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाताओं के नाम, पते और अन्य संबंधित विवरणों की जांच की जाती है तथा पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने से जुड़े कदम उठाए जाते हैं।

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और संशोधन में अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। याचिका में इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र रूप से जांच कराने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध भी किया है। उनकी मांग है कि इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाए और इसमें तकनीकी विशेषज्ञों सहित अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों को शामिल किया जाए। समिति निर्धारित समयसीमा के भीतर SIR के दौरान मतदाता सूची में किए गए बदलावों और नामों को हटाने की प्रक्रिया का ऑडिट करे।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की भी मांग

याचिका में विपक्षी नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग के फैसलों की जांच और SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग के साथ मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग भी उठाई है।

गुरुवार को होने वाली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ताओं की अंतरिम राहत संबंधी मांगों पर क्या रुख अपनाता है और निर्वाचन आयोग से इस मामले में किस तरह का जवाब मांगा जाता है। अदालत की कार्यवाही से यह भी स्पष्ट हो सकता है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े विवाद पर आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।