बिजनौर बैराज का तटबंध पूरी तरह सुरक्षित, भ्रामक खबरों का सिंचाई विभाग ने किया खंडन

एसीबीएम एप्रन का नदी की तेज धारा के साथ ‘लॉन्च’ होना तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा, तटबंध में कटान या टूट-फूट नहीं

बिजनौर ( चिंगारी)। बिजनौर बैराज के तटबंध को लेकर मीडिया में प्रसारित हो रही खबरों को सिंचाई विभाग ने भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बैराज के तटबंध के टूटने अथवा करीब 100 मीटर कंक्रीट ब्लॉक के नदी में समा जाने की खबरें पूरी तरह असत्य हैं। तटबंध सुरक्षित है और कहीं भी कटान या टूट-फूट की स्थिति नहीं है।
सिंचाई विभाग के अनुसार गंगा नदी के बाएं तटबंध पर करीब एक किलोमीटर लंबाई में आधुनिक एसीबीएम (Articulating Concrete Base Mattress) तकनीक से सुरक्षात्मक कार्य कराया गया है। इसके तहत तटबंध के स्लोप पर 8 से 10 मीटर तथा इसके आगे 24 से 26 मीटर तक एप्रन के रूप में एसीबीएम बिछाई गई है।
विभाग ने बताया कि एसीबीएम तकनीक में एप्रन का नदी के तेज बहाव के दौरान अपनी जगह से ‘लॉन्च’ होना निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया है। नदी की धारा जब तटबंध की ओर दबाव बनाती है तो एप्रन आगे खिसककर नदी की धारा के सामने सुरक्षा दीवारनुमा संरचना का रूप लेता है। इसका उद्देश्य तटबंध को नदी के कटाव से सुरक्षित रखना है।

वर्तमान में नदी का जलस्तर बढऩे के कारण कुछ स्थानों पर एसीबीएम एप्रन नियमानुसार ‘लॉन्च’ हो रहा है। विभाग के मुताबिक यह किसी क्षति या दुर्घटना का संकेत नहीं, बल्कि एसीबीएम तकनीक की सामान्य कार्यप्रणाली है।


24 घंटे निगरानी, सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम


बाढ़ नियंत्रण और तटबंध की सुरक्षा को लेकर सिंचाई विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। तटबंध की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। नदी के तेज बहाव का प्रभाव कम करने के लिए ‘बल्ला कटर’ लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही मिट्टी से भरे नायलॉन क्रेट (बोरे) भी लगाए जा रहे हैं।


सिंचाई विभाग ने कहा है कि उसकी पूरी टीम किसी भी अपरिहार्य परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है। विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें और तटबंध की स्थिति के संबंध में प्रशासन एवं विभाग की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।