प्रबल हत्याकाण्ड में 14 साल बाद आया अदालत का फ़ैसला, सात अभियुक्त दोषी करार


संजय गुप्ता एडवोकेट, विनय अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, राहुल गुप्ता, आशीष उर्फ आशु को जेल भेजा गया सजा का ऐलान 31 जुलाई को


बिजनौर (चिंगारी)। लगभग 14 साल पहले हुये बहुचर्चित प्रबल हत्याकाण्ड में अदालत ने आज अपना फैसला सुनाते हुए सात अभियुक्तों को दोषी करार दिया। अदालत द्वारा सजा का ऐलान परसो 31 जुलाई को किया जायेगा। दोषी करार दिये गये अभियुक्तों में संजय गुप्ता एडवोकेट, विनय अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, राहुल गुप्ता, आशीष उर्फ आशु शामिल हैं। इन सभी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।


14 साल तक चली लंबी अदालती कार्रवाई के बाद आखिरकार आज फैसला आया। फैसला सुनाने से पहले अदालत ने सभी सातों अभियुक्तों को कस्टडी में लेने का आदेश दिया। अपर सत्र न्यायाधीश/द्वितीय फास्ट ट्रैक कोर्ट माननीय डॉ. शहजाद अली द्वारा दोषी करार दिये जाने के बाद सभी सात अभियुक्तों को कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया गया।

मीडिया से बात करती प्रबल की बहन


पीडि़त पक्ष, आरोपियों और उनके परिजनों तथा नगरवासियों की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हुई थीं। फैसला कल आना था, लेकिन किसी कारणवश आज की तारीख लगा दी गई थी। सुबह से ही जिला जजी में गहमागहमी का माहौल था। पीडि़त पक्ष तथा आरोपी और उनके परिजन अदालत में मौजूद थे।


अग्रसेन जयंती कार्यक्रम में हुई थी प्रबल की हत्या


मोहल्ला जाटान निवासी प्रबल की हत्या 19 दिसम्बर 2012 को नगर के शहनाई बैंकेट हॉल में आयोजित महाराजा अग्रसेन जयंती समारोह में की गई थी। इस दौरान एक युवती से छेड़छाड़ का आरोप लगाकर समारोह में शामिल कुछ लोगों ने प्रबल की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी और उसका शव ठिकाने लगा दिया था। काफी दिन बाद प्रबल का शव गंगा नदी में रामराज के पास मिला था।


प्रदर्शन भी हुये थे
प्रबल हत्याकाण्ड को लेकर लोगों मेंं आक्रोश फैल गया था। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिये लोगों ने नगर में प्रदर्शन भी किया था और कैंडल मार्च निकाला था। उस समय कई लोगों पर शक था। अग्रवाल समाज के अनेक प्रतिष्ठित लोग गिरफ्तारी के डर से अंडरग्राउंड हो गये थे। बाद में पुलिस ने सात लोगों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की थी।


इकलौता पुत्र था प्रबल
प्रबल अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। एक अविवाहित बहन है। प्रबल उनका एकमात्र सहारा था। प्रबल की हत्या से माता-पिता और बहन गहरे सदमें में पहुंच गये थे। मां सुमन अग्रवाल की हालत तो यह थी कि वह काफी दिन तक अपने घर का दरवाजा दिन-रात खोले हुए रहते थी। उन्हें उम्मीद थी कि उनका प्रबल लौट आएगा। पिता आलोक अग्रवाल और बहन प्राची का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। प्रबल के माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है। बहन प्राची अपने भाई को इंसाफ दिलाने के लिये लगातार अदालती लड़ाई लड़ रही थी।

काफी दिनों तक सुर्खियों में रहा था प्रबल हत्याकाण्ड
अग्रसेन जयंती समारोह में प्रबल की हत्या के बाद आरोपियों ने उसके शव को ठिकाने लगाकर मामले को रफा-दफा करने का काफी प्रयास किया था। पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद प्रबल का कुछ पता नहीं चल पा रहा था। बाद में प्रबल का शव गंगा नदी से बरामद हुआ था।