एक बेजुबान ने निभाई दोस्ती..…
शेरकोट
आजकल के बदलते दौर में जहां कई रिश्ते स्वार्थ की कसौटी पर अक्सर कमजोर नजर आते हैं, वहीं रविवार को एक बेजुबान (कुत्ते) ने वफादारी और अपनापन की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने लोगों के दिलों को झकझोर कर सोचने पर मजबूर कर दिया कि प्यार और अपनापन शब्दों का नहीं, एहसास का रिश्ता होता है। यह कहानी छत से गिरकर असमय काल के गाल में समाई मासूम मेहविश और उस आवारा कुत्ते की, जिसे मासूम हर रोज अपने हाथों से बिस्कुट खिलाया करती थी।
नगर के मौहल्ला शेखान निवासी रिहान अहमद की दो वर्षीय पुत्री मेहविश गत शनिवार की शाम खेलते हुए मकान की छत से गिरकर घायल हो गई थी। इलाज़ के दौरान मुरादाबाद में मेहविश की मौत हो गई थी।
मासूम की मौत से परिजनों और मौहल्ले वासियों को गम का माहौल था। रविवार को गमगीन माहौल में मेहविश का जनाजा घर से निकला तो एक हैरत में डालने वाला दृश्य सामने आया। एक आवारा घूमने वाला कुत्ता भी चुपचाप जनाजे के पीछे पीछे चल दिया। पहले तो लोगों ने उसपर ध्यान नही दिया, लेकिन नमाज़ के लिए जनाजा रूकने पर कुत्ता भी मुंह लटकाकर शांत बैठ गया और उसके बाद कब्रिस्तान के लिए चलने पर फिर उसके पीछे-पीछे चल दिया। जहां रस्में पूरी होने तक बेजुबान आसपास ऐसे मंडराता रहा, मानो वो जैसे किसी को तलाश रहा हो।उसकी मौजूदगी ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया ।
चर्चा हुई तो पता लगा कि इस बेजुबान को मासूम मेहविश रोज बिस्कुट खिलाया करती थी और ये रोज उसके घर से बाहर निकलने का इंतजार करता था। शायद उसी अपनेपन ने बेजुबान के दिल में ऐसा रिश्ता बना दिया था, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। कुत्ता मेहविश के घर के पास आकर बैठ गया और उसकी निगाहें बस उसी दरवाजे पर टिकी रहीं , जहां से उसे एक दोस्त का प्यार मिलता था। कुछ लोगों ने बेजुबान को बिस्कुट आदि डालकर खिलाने का प्रयास भी किया, लेकिन उसने खाना गवारा नहीं किया। बेजुबान की खामोश मौजूदगी ने वहां मौजूद लोगों को ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि प्यार, अपनापन और वफादारी केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि ऐसे एहसास हैं जिन्हें बेजुबान भी पूरी शिद्दत से निभाते हैं। ये मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।







