बिजनौर: आवास विकास कॉलोनी में बदहाल सड़कों से लोग परेशान, पांच महीने से अधूरा पड़ा निर्माण कार्य
कहीं सड़कें उखड़ीं, कहीं नालियां और पुलिया अधूरी; स्थानीय निवासियों ने अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल, बोले—चुनाव में जवाब मांगेंगे
बिजनौर। शहर की आवास विकास कॉलोनी में सड़क निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के फंड से कराए जा रहे निर्माण कार्य के चलते कॉलोनी की कई सड़कें महीनों से बदहाल पड़ी हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों को अपने घरों तक पहुंचने, पैदल निकलने और वाहनों से आने-जाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि करीब चार से पांच महीने बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है, जबकि सड़कें तोड़कर छोड़ दिए जाने से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
पांच महीने पहले तोड़ी गईं सड़कें, अब तक नहीं हुआ निर्माण पूरा
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बीएसए कार्यालय के पीछे स्थित आवास विकास कॉलोनी में ठेकेदार ने करीब पांच महीने पहले पुरानी सड़कों और रैंप को तोड़ दिया था। इसके बाद नालियों का निर्माण तो कराया गया, लेकिन सड़कें दोबारा बनाने का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। निवासियों का कहना है कि करीब चार महीने से नालियां बनी हुई हैं, मगर उनके आसपास की सड़कों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य एक साथ पूरा करने के बजाय अलग-अलग समय पर नई सड़कों को उखाड़ दिया जाता है। इससे कॉलोनी की चार से पांच सड़कें ऐसी हो गई हैं, जिन पर आवागमन करना बेहद कठिन हो गया है। निर्माण कार्य की धीमी गति के कारण लोगों को लगातार असुविधा झेलनी पड़ रही है।
धूल-मिट्टी और मलबे से बढ़ी परेशानी
कॉलोनी की सड़कों पर जगह-जगह पुरानी सड़क का मलबा, मिट्टी और निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है। कहीं नालियां बनाकर काम अधूरा छोड़ दिया गया है, तो कहीं पुलिया का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में स्थानीय निवासियों को पैदल चलने के साथ ही दोपहिया और चारपहिया वाहन निकालने में भी दिक्कत होती है।
सड़कें उखड़ी होने से धूल-मिट्टी की समस्या भी बनी हुई है। लोगों का कहना है कि उन्हें रोजाना इन्हीं रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण राहत मिलने की उम्मीद लगातार टल रही है।
आसपास के घरों तक पहुंचना भी हुआ मुश्किल
सड़क और नाली निर्माण की अधूरी व्यवस्था ने कॉलोनी के आंतरिक संपर्क मार्गों को भी प्रभावित किया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई रास्ते बाधित होने से आसपास के घरों और पड़ोस में जाने के लिए भी लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इससे न केवल समय बर्बाद होता है, बल्कि दैनिक आवागमन में भी अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है।
निवासियों का कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य लोगों को बेहतर सुविधाएं देना होता है, लेकिन लंबे समय से काम अधूरा रहने के कारण उन्हें इसका लाभ मिलने के बजाय परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठाए सवाल
स्थानीय निवासी रणवीर सिंह, ओमप्रकाश परमार, जितेन्द्र खरबंदा और तरुण चौधरी का कहना है कि वे पिछले चार से पांच महीनों से इन समस्याओं के बीच रहने को मजबूर हैं। उनके मुताबिक, अब तक न तो निर्माण कार्य पूरा कराने की दिशा में प्रभावी पहल दिखाई दे रही है और न ही उनकी परेशानी को गंभीरता से लिया जा रहा है।
निवासियों ने संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कॉलोनी के लोगों को लंबे समय से परेशानी झेलनी पड़ रही है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य समय पर पूरा कराया जाता, तो लोगों को इतने लंबे समय तक बदहाल रास्तों से नहीं गुजरना पड़ता।
चुनावी वर्ष में मुद्दा उठाने की तैयारी
आवास विकास कॉलोनी के निवासियों में निर्माण कार्य की धीमी गति को लेकर नाराजगी है। लोगों का कहना है कि चुनावी वर्ष में भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होना समझ से परे है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य पूरा कराकर आवागमन सुचारु नहीं किया गया, तो इस मुद्दे को चुनाव के दौरान प्रमुखता से उठाया जाएगा।
स्थानीय निवासियों की मांग है कि संबंधित विभाग निर्माण कार्य की स्थिति की समीक्षा करे, ठेकेदार से काम पूरा कराने के लिए समयसीमा तय करे और क्षतिग्रस्त सड़कों को जल्द दुरुस्त कराया जाए। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या का संज्ञान लेकर कॉलोनीवासियों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।







