BRICS शिखर सम्मेलन 2026: पीएम मोदी का विजन — हमारी विविधता पहचान रहे हमारी और हमारा सहयोग, हमारी प्रेरणा बने…

भारत की अध्यक्षता में BRICS का नया दृष्टिकोण

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व नेताओं को संबोधित किया। उन्होंने चार स्तंभों — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता — पर केंद्रित विजन प्रस्तुत किया।

मोदी ने कहा कि BRICS विभिन्न महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास यात्राओं को जोड़ने वाला मंच है, जो इसकी बढ़ती ताकत और विश्वास का प्रमाण है। भारत की अध्यक्षता में सभी प्रयास इन्हीं चार स्तंभों पर केंद्रित रहे हैं।

लचीलापन: संकटों से निपटने की तैयारी

  • अर्ली वार्निंग सिस्टम: महामारी, जलवायु आपदा और सप्लाई चेन संकटों को देखते हुए BRICS ने एकीकृत अर्ली वार्निंग सिस्टम पर सहमति बनाई।
  • आपदा प्रबंधन गाइडलाइन: डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइन तैयार की गई ताकि आपदा प्रबंधन अधिक प्रभावी हो सके।
  • सप्लाई चेन फ्रेमवर्क: लॉजिस्टिक सप्लाई चेन को अधिक भरोसेमंद और लचीला बनाने के लिए नया फ्रेमवर्क पेश किया गया।

💡 नवाचार: स्टार्टअप्स और तकनीक को बढ़ावा

  • इनक्यूबेटर नेटवर्क: स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स को जोड़ने के लिए नेटवर्क बनाया गया।
  • इनोवेशन फंड: स्केलेबल और इनोवेटिव समाधान को बढ़ावा देने के लिए फंड का प्रस्ताव रखा गया।
  • डिजिटल एग्रीकल्चर: किसानों के लिए एआई, जियोस्पेशल टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ने वाला नेटवर्क तैयार किया गया।

🤝 सहयोग: समाज के हर वर्ग की भागीदारी

  • BRICS Connect: स्किल्स, रोजगार, महिला कार्यबल और सोशल सिक्योरिटी को बढ़ावा देने के लिए पहल।
  • MSME पोर्टल: छोटे उद्यमों को नॉलेज, फाइनेंस और नए बाजारों से जोड़ने का प्रयास।
  • अर्बन मोबिलिटी हब: शहरों के बीच बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने के लिए हब की स्थापना।

स्थिरता: विकास और पर्यावरण का संतुलन

  • डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: स्मार्ट ग्रिड्स और एनर्जी स्टोरेज के लिए डिजिटल सेंटर बनाया गया।
  • एग्रो-इकोलॉजी सेंटर्स: पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने वाले सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस।
  • क्लाइमेट एडप्टेशन सिद्धांत: स्थानीय और पारंपरिक ज्ञान को जलवायु कार्रवाई का आधार बनाने की पहल।

ग्लोबल साउथ: समावेशी विकास की दिशा

मोदी ने कहा कि BRICS के समाधान केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें ग्लोबल साउथ की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि BRICS में ग्लोबल साउथ की आवाज सुनी जाती है और उनके अनुभवों का सम्मान होता है।

पीएम मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन इन शब्दों से किया: “हम अलग-अलग वास्तविकताओं में जड़ें जमाए हुए हो सकते हैं, लेकिन सहयोग के माध्यम से हम उठते हैं और मानवता के लिए खिलते हैं। हमारी विविधता हमारी पहचान रहे। हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आए।”