गुलदार के आतंक से कुत्तों को बचाने के लिए ग्रामीणों ने अपनाया अनोखा तरीका, गर्दन में बांधी नुकीली बेल्ट
बिजनौर। जिले में आदमखोर गुलदार का आतंक लगातार ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। गुलदार के हमलों का खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में रहने वाले पालतू और आवारा पशु भी उसके निशाने पर हैं। इसी खतरे को देखते हुए शिवाला कलां क्षेत्र के ग्राम सेला में ग्रामीणों ने अपने कुत्तों को गुलदार के हमले से बचाने के लिए एक अनोखा उपाय अपनाया है।
ग्रामीणों ने गांव में घूमने वाले कुत्तों की गर्दन में नुकीली बेल्ट बांधनी शुरू कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार अक्सर कुत्तों को पकड़ने के लिए उनकी गर्दन पर हमला करता है। ऐसे में गर्दन के चारों ओर नुकीली बेल्ट होने से गुलदार के लिए कुत्ते की गर्दन को अपने जबड़े में पकड़ना मुश्किल हो सकता है।
गुलदार के हमलों से ग्रामीणों में दहशत
ग्राम सेला और आसपास के क्षेत्रों में गुलदार की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में भय का माहौल है। शाम ढलने के बाद लोग अपने घरों से बाहर निकलने में सावधानी बरत रहे हैं। ग्रामीणों को अपने बच्चों और पशुओं की सुरक्षा की भी चिंता बनी हुई है।
कुत्ते गांवों में रात के समय अक्सर घरों और गलियों के आसपास घूमते हैं। गुलदार के लिए ये अपेक्षाकृत आसान शिकार माने जाते हैं। इसी वजह से ग्रामीणों ने कुत्तों को बचाने के लिए यह तरीका अपनाया है।
ग्रामीणों को उम्मीद, गर्दन पर हमला नहीं कर पाएगा गुलदार
ग्रामीणों का मानना है कि नुकीली बेल्ट गुलदार को कुत्तों की गर्दन पकड़ने से रोक सकती है। उनका कहना है कि यदि गुलदार कुत्ते की गर्दन पर झपटेगा तो बेल्ट में लगे नुकीले हिस्से उसके मुंह या चेहरे में चुभ सकते हैं, जिससे वह हमला छोड़ सकता है।
हालांकि, यह तरीका ग्रामीणों द्वारा अपनी ओर से अपनाया गया उपाय है।
वन विभाग से कार्रवाई की मांग
गुलदार के लगातार दिखाई देने और पशुओं पर हमले की आशंका के बीच ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और गुलदार को पकड़ने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक गुलदार के आतंक से निजात नहीं मिलती, तब तक गांव में भय का माहौल बना रहेगा।









