औद्योगिक गलियारे में बाधा बनी मालन नदी, प्रशासन तलाश रहा नई जमीन
बिजनौर जिले में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए औद्योगिक गलियारा बनाने की योजना पर काम चल रहा है। प्रशासन ने इसके लिए 1000 हेक्टेयर जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन मालन नदी के पानी से प्रभावित होने की आशंका के कारण 400 हेक्टेयर जमीन अनुपयुक्त मान ली गई है। अब प्रशासन पास ही दूसरी जमीन तलाश रहा है ताकि एक ही स्थान पर 1000 हेक्टेयर का औद्योगिक हब विकसित किया जा सके।
जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया
- बिजनौर तहसील के 10 गांवों — युसुफाबाद, उलकपुर, स्वाहेड़ी बुजुर्ग, अलीपुर माखन, मुढाला, किशनपुर, नूरपुर डालू, फिरोजपुर रतन, खाना पट्टी और पपावरखुर्द — में कुल 683.8339 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है।
- इन गांवों की 4263 गाटा संख्याओं में जमीन चिन्हित की गई है।
- यूपीडा ने कुछ जमीनों को अनुपयुक्त बताया है, जिसके चलते प्रशासन नई जमीन का निरीक्षण कर रहा है।
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे से जुड़ाव
औद्योगिक गलियारा गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किया जाना है। यह एक्सप्रेसवे चिह्नित गांवों के पास से गुजरता है, जिससे जिले को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
औद्योगिक गलियारे के संभावित फायदे
- निवेश वृद्धि: नए उद्योगों के आने से जिले में निवेश बढ़ेगा।
- रोजगार अवसर: स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- अर्थव्यवस्था मजबूत: जिले की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
- स्थानीय कारोबार विस्तार: होटल, वाहन मरम्मत, परिवहन और अन्य सेवाओं का विस्तार होगा।
- कनेक्टिविटी सुधार: एक्सप्रेसवे से जुड़ाव के कारण शहरी सुविधाएं बढ़ेंगी।
- एमएसएमई सप्लाई चेन: छोटे और मध्यम उद्योगों को नई सप्लाई चेन का लाभ मिलेगा।








