परिसीमन बिल पर बढ़ी सियासी हलचल – विशेष सत्र की तैयारी
16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र, परिसीमन बिल और FCRA संशोधन विधेयक पर चर्चा
परिसीमन बिल को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक सरकार 15 अगस्त के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। आज संसद में जारी गतिरोध को दूर करने के प्रयासों के तहत संसदीय कार्यमंत्री किरन रिजिजू और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच लंबी चर्चा हुई।
🔑 सरकार की रणनीति
- सूत्रों के अनुसार 16 से 18 अगस्त तक विशेष सत्र बुलाने की योजना है।
- इस दौरान सरकार की कोशिश होगी कि परिसीमन बिल पर चर्चा कर उसे पारित कराया जाए।
- इसके लिए सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क साध रही है ताकि व्यापक सहमति बनाई जा सके।
🤝 विपक्ष से संवाद
- संसद में गतिरोध तोड़ने के लिए किरेन रिजिजू को राहुल और प्रियंका गांधी से बात करने की जिम्मेदारी दी गई है।
- अन्य विपक्षी दलों से संवाद स्थापित करने का काम केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी, पीयूष गोयल, अर्जुनराम मेघवाल और एस मुरुगन को सौंपा गया है।
📌 FCRA संशोधन विधेयक भी एजेंडे में
इसके साथ ही सरकार अगले सप्ताह Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 पेश करने की तैयारी कर रही है। यह विधेयक विदेशी अंशदान से जुड़े मौजूदा कानून में संशोधन का प्रस्ताव लेकर आएगा। हालांकि विशेष सत्र की तारीख और एजेंडा को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
🏛️ कांग्रेस का रुख
कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह परिसीमन बिल का विरोध करेगी। मानसून सत्र से पहले हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में पार्टी ने तय किया था कि अगर सरकार यह बिल लाती है तो इसका विरोध किया जाएगा।
📖 क्या है परिसीमन बिल?
- इस बिल के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान है।
- सांसदों और विधायकों की संख्या बढ़ाने के लिए परिसीमन से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
- लोकसभा में सदस्यों की संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाएगी।
- इनमें से 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी।
- इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।
परिसीमन बिल और एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर संसद का आगामी विशेष सत्र बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार जहां व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष खासकर कांग्रेस ने विरोध का ऐलान कर दिया है। आने वाले दिनों में इस सत्र का एजेंडा भारतीय राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।







