गर्म राख ने छीन ली मासूम मुस्कान
झुलसे पांच बच्चों में से शाद की मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, मेरठ मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान तोड़ा दम
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तीन बच्चों की हालत अब भी गंभीर, आर्थिक तंगी बनी बेहतर इलाज में बड़ी बाधा
बिजनौर (चिंगारी)। शुगर मिल की गर्म राख में झुलसे पांच मासूम बच्चों में से एक बच्चे की मौत ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया। करीब डेढ़ महीने से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे 13 वर्षीय शाद ने मंगलवार देर रात मेरठ मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मोहल्ले में मातम छा गया। शाद की मौत ने उन परिवारों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है, जिनके बच्चे अभी भी गंभीर हालत में उपचाराधीन हैं।
आम खाने गए थे बच्चे, गर्म राख ने बदल दी जिंदगी
गत एक मई को स्थानीय मोहल्ला लड़ापुरा और चाहशीरी के छह-सात बच्चे नूरपुर रोड स्थित चक्कर चौराहे के पास एक बाग में आम खाने गए थे। बच्चों की मस्ती और खेल-कूद के बीच किसी को अंदाजा नहीं था कि वहां पड़ी शुगर मिल की गर्म राख उनकी जिंदगी पर इतना बड़ा कहर बनकर टूट पड़ेगी।
इसी दौरान शाद (13 वर्ष) पुत्र दिलशाद, उज़ैद (12 वर्ष) पुत्र रशीद, रिहान (13 वर्ष) पुत्र इमरान, साहिल (12 वर्ष) पुत्र वसीम तथा बिलाल (12 वर्ष) पुत्र निसार गर्म राख की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए थे। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई थी, जबकि प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मच गया था।
शुगर मिल व बाग मालिक को दिया था नोटिस
गंभीर रूप से झुलसे बच्चों को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने शुगर मिल बिजनौर और संबंधित बाग स्वामी को नोटिस जारी किए थे। वहीं सदर विधायक सूची मौसम चौधरी के पति एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता मौसम चौधरी भी अस्पताल पहुंचे थे और बच्चों का हालचाल जाना था।
उन्होंने पीड़ित परिवारों की मदद के लिए प्रत्येक बच्चे को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की थी, ताकि उनका बेहतर उपचार कराया जा सके।
आर्थिक तंगी के कारण नहीं हुआ बेहतर इलाज
परिजनों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्चों का उपचार किसी बड़े और विशेषज्ञ अस्पताल में लगातार नहीं हो सका। परिवार अपने स्तर पर कभी एक अस्पताल तो कभी दूसरे अस्पताल में बच्चों का इलाज कराते रहे। इस बीच शाद की हालत लगातार नाजुक बनी रही।
बताया जाता है कि मंगलवार शाम उसकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। परिजन उसे तत्काल मेरठ मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन उपचार के दौरान रात लगभग एक बजे उसने दम तोड़ दिया।
शाद की मौत की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। मां-बाप और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मोहल्ले में भी शोक की लहर दौड़ गई।
तीन बच्चों की हालत अब भी चिंताजनक
शाद की मौत के बाद अब उज़ैद, रिहान और साहिल की स्थिति को लेकर परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। तीनों बच्चों का उपचार जारी है, लेकिन उनकी हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है। आर्थिक संसाधनों की कमी के चलते परिवार बेहतर और उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं नहीं जुटा पा रहे हैं।
शाद की मौत ने इन परिवारों के दिलों में किसी अनहोनी का डर बैठा दिया है। वहीं झुलसे बच्चों में बिलाल की हालत अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है। वह अब सामान्य रूप से खा-पी रहा है और चलने-फिरने में भी सक्षम है।
बेहतर इलाज के लिए होती रहीं कोशिशें
भाजपा नेता ऐश्वर्य मौसम चौधरी तथा जिला प्रशासन लगातार प्रयास करते रहे कि बच्चों को किसी बड़े अस्पताल में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। कई स्तरों पर पहल भी की गई, लेकिन विभिन्न कारणों से बच्चों को बड़े चिकित्सा संस्थानों में नियमित रूप से उपचार नहीं मिल सका। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कोशिशों के बावजूद परिस्थितियां अनुकूल नहीं बन पाईं।
परिजनों ने कार्रवाई से किया इनकार
बच्चों के परिजनों ने एसडीएम सदर को लिखित रूप से अवगत कराया था कि बच्चे नादानी में घूमते हुए उस स्थान पर पहुंच गए थे और उन्हें वहां गर्म राख पड़े होने की जानकारी नहीं थी। राख में चले जाने के कारण वे गंभीर रूप से झुलस गए थे।
परिजनों ने अपने बयान में यह भी कहा था कि इस घटना में शुगर मिल बिजनौर की कोई गलती नहीं है और वे भविष्य में मिल प्रबंधन के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं करना चाहते।
एक सवाल अब भी
एक मासूम की मौत और तीन बच्चों की जिंदगी पर मंडराते खतरे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर खतरनाक औद्योगिक अवशेषों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर कितनी सतर्कता बरती जा रही है। फिलहाल शाद की मौत ने एक परिवार से उसकी खुशियां छीन ली हैं, जबकि अन्य परिवार अपने बच्चों के स्वस्थ होकर लौट आने की दुआओं में दिन-रात गुजार रहे हैं।







