NEET पेपर लीक मामला: सुप्रीम कोर्ट ने NTA को लगाई कड़ी फटकार

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

NEET-UG पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने सवाल उठाया कि जब निगरानी तंत्र और समितियाँ मौजूद थीं, तो इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई। न्यायालय ने UPSC का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की सर्वोच्च सिविल सेवा परीक्षा में कभी ऐसी घटनाएँ नहीं हुईं और NTA को UPSC की प्रणाली से सबक लेना चाहिए।

उच्च स्तरीय समिति पर सवाल

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने डॉ. राधाकृष्णन से पूछा कि समिति की सिफारिशों के बाद निगरानी किस हद तक की गई थी। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि किन पहलुओं पर समिति ने विचार नहीं किया, जिसके चलते पहले से सुझाए गए सुरक्षा उपायों के बावजूद प्रश्नपत्र लीक हो गया।

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ

  • निगरानी समिति: अदालत ने सुझाव दिया कि एक छोटी निगरानी समिति गठित कर प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग किया जा सकता है।
  • IIT से सुझाव: सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कुछ सुझाव IIT से लिए जा सकते हैं।
  • AI सहयोग: न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि बदलती पद्धतियों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालयों के साथ समन्वय किया जा सकता है।
  • हलफनामे: NTA निदेशक और डॉ. राधाकृष्णन ने हलफनामे दाखिल किए हैं, जिनमें समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन का उल्लेख है। केंद्र सरकार को भी 2 जुलाई से पहले हलफनामा दाखिल करना होगा।

केंद्र सरकार की भूमिका

मानव संसाधन विकास मंत्रालय केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करेगा और हलफनामा दाखिल करेगा। इसमें यह बताया जाएगा कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को कैसे सुरक्षित बनाया जाएगा और विशेषज्ञ कर्मियों की नियुक्ति के साथ संस्थागत स्मृति को कैसे मजबूत किया जाएगा।

युवाओं के प्रति संवेदनशीलता

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि “हमें अपने युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए। उन्होंने इस परीक्षा में बहुत समय और भावनाएँ लगाई हैं।” अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

यह सुनवाई छात्रों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह परीक्षा की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से जुड़ा मामला है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ संकेत देती हैं कि आने वाले समय में परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।