कॉम्पलेक्स की भेंट चढ़ा बूढ़ा बरगद, बिजनौर में है कोई पेड़ों को बचाने वाला?

बिजनौर (चिंगारी)। ‘कटकर जो गिर पड़ा, कई पंछियों का आशियाना था इस बूढ़े शजर में।’ स्टेशन रोड पर खड़ा बेहद घना पुराना लगभग 30-40 फुट लंबा व व्यास वाला वटवृक्ष निजी स्वार्थों की पूर्ति के चलते काट दिया गया। पेड़ पर चले आरे के निशान देखकर संवेदनशील लोग अत्यंत आक्रोशित व दुखी हैं। उनका कहना है कि इस रोड पर यही एक मात्र वटवृक्ष था, जो लोगों को अपनी छांव से नवाजकर उन्हें ठंडक पहुंचाता था।

सुहागिनों के पर्व वटसावित्री पर अनेक लोग पूजन के लिये उसकी टहनियां घर ले जाते थे। कई पंछियों का घर भी था इसमें।इसका कसूर सिर्फ इतना था कि यह अभी हाल ही में बने भव्य कॉम्पलेक्स के आड़े आ रहा था। प्रतिष्ठान स्वामी ने अपने फायदे के लिये पर्यावरण का बड़ा नुकसान कर दिया। लोगों का यह भी कहना है कि वन विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से नगर में हरे-भरे पेड़ों का प्रतिदिन अवैध कटान किया जा रहा है। लेकिन कोई सुनने व देखने वाला नहीं है। यही हाल रहा तो जमीन बिल्कुल गंजा हो जायेगी और आने वाली पीढ़ी स्वच्छ हवा व सांसों के लिये तरस जायेगी।

पेड़ों को काटना विकास नहीं, बल्कि महाविनाश लीला है। अब वक्त आ गया है कि जनआंदोलन के द्वारा हरे-भरे पेड़ों के कटान पर तुरंत रोक लगायी जाये।