महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरा, सरकार को नहीं मिला दो-तिहाई बहुमत
शुक्रवार को लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026 पर वोटिंग कराई गई। यह बिल महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने से जुड़ा था, जिसे 2029 के आम चुनावों से लागू करने का प्रस्ताव था।
हालांकि, बिल को पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया।
- पक्ष में वोट: 298
- विपक्ष में वोट: 230
- जरूरी वोट: कम से कम 352
इस तरह बिल 54 वोटों से गिर गया और पास नहीं हो सका।
⚖️ विपक्ष का विरोध और सरकार की अपील
- बिल पर लंबी बहस चली, जिसमें विपक्ष ने लगातार विरोध किया।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष से समर्थन की अपील की थी।
- गृह मंत्री अमित शाह ने बहस के दौरान कहा कि विपक्ष मुख्य रूप से महिला आरक्षण का विरोध कर रहा है।
- बिल गिरने के बाद अमित शाह, राजनाथ सिंह और अन्य नेताओं ने विपक्ष की आलोचना की।
📊 अन्य बिलों पर असर
महिला आरक्षण बिल के साथ ही सरकार ने दो और बिल पेश किए थे:
- परिसीमन विधेयक, 2026
- संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026
लेकिन महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि अब इन दोनों बिलों को भी आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
🚨 संसद परिसर में विरोध-प्रदर्शन
जैसे ही स्पीकर ने बिल गिरने का ऐलान किया, संसद की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। इसके बाद NDA की महिला सांसदों ने संसद परिसर में विपक्षी दलों के खिलाफ प्रोटेस्ट शुरू कर दिया।
महिला आरक्षण बिल का गिरना भारतीय राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम है। यह दिखाता है कि संवैधानिक संशोधन जैसे अहम मुद्दों पर सहमति बनाना कितना कठिन है। अब यह देखना होगा कि आने वाले समय में सरकार इस बिल को फिर से पेश करती है या नहीं।







