श्रीनगर में भीषण अग्निकांड: बेमिना की झुग्गी बस्ती में लगी आग से 80 झोपड़ियां जलकर राख, दो लोगों की दर्दनाक मौत

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में मंगलवार (4 नवंबर) की देर रात एक भीषण अग्निकांड ने भारी तबाही मचा दी। शहर के बेमिना इलाके के दुर्बल में स्थित झुग्गी बस्ती में अचानक आग लगने से करीब 80 अस्थायी झोपड़ियां जलकर पूरी तरह राख हो गईं। इस हादसे में दो लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। दोनों मृतक कबाड़ बीनने का काम करते थे। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आग 3 और 4 नवंबर की दरमियानी रात करीब 12 बजकर 23 मिनट पर लगी। शुरुआती जानकारी में आग लगने की वजह झुग्गियों में रखी ज्वलनशील सामग्री को माना जा रहा है। बस्ती में अधिकतर अस्थायी झोपड़ियां लकड़ी और तिरपाल से बनी हुई थीं। झोपड़ियां एक-दूसरे के काफी नजदीक होने के कारण आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया और देखते ही देखते पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया।

आग की लपटें इतनी तेज थीं कि लोगों को अपना सामान निकालने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का पर्याप्त समय तक नहीं मिल सका। हादसे में बड़ी संख्या में परिवारों का घरेलू सामान और अन्य जरूरी वस्तुएं भी जलकर नष्ट हो गईं।

कई फायर स्टेशनों की टीमें मौके पर पहुंचीं, घंटों चला राहत अभियान

अग्निकांड की सूचना मिलते ही JVC और रावलपोरा फायर स्टेशनों की दमकल टीमें तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं। आग की गंभीरता और तेजी से फैलती लपटों को देखते हुए बटामालू स्थित फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के मुख्यालय से भी अतिरिक्त दमकलकर्मियों और संसाधनों को रवाना किया गया।

श्रीनगर के डिप्टी डायरेक्टर कमांड एवं मोबिलाइजिंग ऑफिसर एजाज अहमद शाह के नेतृत्व में DFO सिटी और DFO मुख्यालय के समन्वय से कई फायर स्टेशनों की टीमों ने संयुक्त रूप से आग बुझाने का अभियान चलाया। दमकलकर्मियों को आग पर नियंत्रण पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि, तब तक करीब 80 झुग्गियां पूरी तरह जल चुकी थीं। आग की तपिश और लपटों का असर आसपास मौजूद संपत्तियों पर भी पड़ा। घटनास्थल के पास स्थित एक खाली पोल्ट्री फार्म और वहां खड़ा एक टिपर भी आग तथा अत्यधिक गर्मी के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

मलबे से मिले दो जले हुए शव, दिल्ली के रहने वाले थे मृतक

आग बुझने के बाद दमकल और बचाव दल ने घटनास्थल पर तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान मलबे के नीचे से दो लोगों के जले हुए शव बरामद हुए। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान 27 वर्षीय मोहम्मद नूर आलम और 16 वर्षीय अल अमीन के रूप में हुई है।

जानकारी के मुताबिक, मोहम्मद नूर आलम के पिता का नाम अब्दुल वहाब था। वह मूल रूप से दिल्ली का रहने वाला था और वर्तमान में श्रीनगर के दुर्बल इलाके में रह रहा था। वहीं, दूसरे मृतक अल अमीन के पिता का नाम मोहम्मद रफी बताया गया है। वह भी दिल्ली का निवासी था और फिलहाल कुपवाड़ा में रह रहा था।

बताया गया है कि दोनों युवक स्थानीय स्तर पर कबाड़ बीनने का काम करते थे। देर रात लगी आग के दौरान वे इसकी चपेट में आ गए और बाहर नहीं निकल सके। इस हादसे में दोनों की मौत हो गई।

फॉरेंसिक जांच के बाद पुलिस को सौंपे गए शव

घटनास्थल पर आग बुझाने और तलाशी अभियान के बाद फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कीं। घटनास्थल का निरीक्षण और साक्ष्य जुटाने के बाद दोनों शवों को कानूनी औपचारिकताओं के लिए स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंपे जाएंगे। वहीं, पुलिस ने अग्निकांड के कारणों की जांच शुरू कर दी है। आग शॉर्ट सर्किट, किसी अन्य तकनीकी वजह या ज्वलनशील सामग्री के कारण लगी, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

श्रीनगर में आग की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

श्रीनगर में हुई इस घटना ने एक बार फिर घनी आबादी वाली अस्थायी बस्तियों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लकड़ी, प्लास्टिक और तिरपाल जैसी आसानी से आग पकड़ने वाली सामग्रियों से बनी झुग्गियों में आग लगने की स्थिति में नुकसान तेजी से बढ़ने का खतरा रहता है।

गौरतलब है कि इससे पहले 26 अक्टूबर को जम्मू रेलवे स्टेशन के सामने स्थित शिवा मार्केट में भी भीषण आग लगी थी। उस घटना में करीब 35 से 40 दुकानें और एक होटल आग की चपेट में आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

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