पीएम मोदी ने पुणे को दी 21,800 करोड़ की मेट्रो परियोजनाओं की सौगात, 23 किमी लंबी पिंक लाइन का किया उद्घाटन
पुणे: महाराष्ट्र के पुणे शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पुणे मेट्रो की 23 किलोमीटर लंबी पिंक लाइन (लाइन-3) का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने पुणे मेट्रो के दूसरे चरण (फेज-2) की आधारशिला भी रखी। इन सभी परियोजनाओं पर लगभग 21,800 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से पुणे की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने देश में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2014 से पहले भारत में मेट्रो का परिचालन नेटवर्क महज 248 किलोमीटर था, जो अब बढ़कर करीब 1,200 किलोमीटर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के शहरी परिवहन ढांचे में व्यापक बदलाव आया है और मेट्रो सेवाओं का विस्तार कई नए शहरों तक हुआ है।
23 किलोमीटर लंबी पिंक लाइन से जुड़ेंगे प्रमुख इलाके
पुणे मेट्रो की नई पिंक लाइन करीब 23 किलोमीटर लंबी है और इसे 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। यह कॉरिडोर हिंजेवाड़ी और शिवाजीनगर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। हिंजेवाड़ी पुणे का प्रमुख आईटी और कारोबारी केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में आईटी कंपनियां और अन्य व्यावसायिक संस्थान मौजूद हैं।
इस मेट्रो कॉरिडोर के चालू होने से आईटी सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ विद्यार्थियों, व्यापारियों और आम यात्रियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। सड़क मार्ग पर बढ़ते ट्रैफिक के बीच मेट्रो सेवा लोगों को आवागमन का एक वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराएगी। इससे यात्रा का समय कम करने और सड़कों पर वाहनों का दबाव घटाने में भी मदद मिल सकती है।
मेट्रो फेज-2 पर खर्च होंगे करीब 13,500 करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुणे मेट्रो के दूसरे चरण यानी फेज-2 की आधारशिला भी रखी। इस परियोजना पर लगभग 13,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके पूरा होने के बाद शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच मेट्रो कनेक्टिविटी का दायरा और व्यापक होगा।
पिंक लाइन के उद्घाटन और फेज-2 के शिलान्यास को मिलाकर पुणे में करीब 21,800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर की बढ़ती आबादी और परिवहन संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक यातायात व्यवस्था को मजबूत करना है।
2014 में 248 किलोमीटर था देश का मेट्रो नेटवर्क, अब 1,200 किमी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में मेट्रो सेवाओं के विस्तार से जुड़े आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि भारत में पहली मेट्रो सेवा वर्ष 1984 में शुरू हुई थी। इसके बाद करीब तीन दशकों तक मेट्रो नेटवर्क का विस्तार सीमित गति से हुआ और वर्ष 2014 तक देश में केवल 248 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क विकसित हो पाया था।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, वर्ष 2014 में देश के केवल पांच शहरों में मेट्रो सेवाएं उपलब्ध थीं। इसके बाद शहरी परिवहन को बेहतर बनाने और शहरों में रहने वाले लोगों की यात्रा को सुविधाजनक करने के उद्देश्य से मेट्रो परियोजनाओं के विस्तार पर ध्यान दिया गया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश का परिचालन मेट्रो नेटवर्क बढ़कर लगभग 1,200 किलोमीटर हो गया है और अब 26 शहरों में मेट्रो सेवाएं संचालित हो रही हैं। इससे देश के शहरी परिवहन ढांचे में आए बदलाव का पता चलता है।
आईटी और औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
प्रधानमंत्री मोदी ने पुणे की आर्थिक और औद्योगिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर आईटी, ऑटोमोबाइल, फार्मा, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। बड़ी संख्या में युवा रोजगार और कारोबार के अवसरों के लिए पुणे का रुख कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी आधुनिक शहर का विकास केवल उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होता। वहां रहने वाले लोगों को मिलने वाली सुविधाएं, बेहतर परिवहन व्यवस्था और कारोबार करने में आसानी भी शहर की प्रगति के महत्वपूर्ण आधार हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन परियोजनाएं शहरों में जीवन की गुणवत्ता सुधारने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से कर्मचारियों, कारोबारियों और आम नागरिकों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सुविधा मिलती है।
पुणे मेट्रो खुद तैयार करेगी 30 प्रतिशत बिजली
कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे मेट्रो की ऊर्जा व्यवस्था और पर्यावरण अनुकूल पहल का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पुणे मेट्रो अपनी कुल बिजली जरूरत का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा खुद उत्पन्न करेगी।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, बिजली उत्पादन की इस व्यवस्था से मेट्रो की ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और इसे पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने पुणे मेट्रो की उपलब्धियों और नए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि शहर में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार भविष्य की परिवहन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
पुणे के शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा
पुणे में मेट्रो की नई परियोजनाओं के शुरू होने से शहर के परिवहन ढांचे को विस्तार मिलने की उम्मीद है। खासकर हिंजेवाड़ी जैसे आईटी केंद्रों को मेट्रो से जोड़ने पर कर्मचारियों और दूसरे यात्रियों को सड़क यातायात पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा।
पिंक लाइन के उद्घाटन और फेज-2 के निर्माण कार्य से पुणे में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। आने वाले समय में इन परियोजनाओं के पूरा होने के साथ शहर की कनेक्टिविटी, यातायात प्रबंधन और शहरी विकास पर इसका असर देखने को मिल सकता है।








