हरियाणा में बिजली संकट गहराया: गुरुग्राम समेत कई जिलों में सप्लाई ठप, सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुलाया

हरियाणा में निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से गुरुग्राम समेत कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। 12 घंटे में 3,000 से अधिक शिकायतें दर्ज होने के बाद सरकार ने कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुलाया।

हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में बिजली निगम के कर्मचारियों की हड़ताल से प्रदेश के कई जिलों में बिजली संकट गहरा गया है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, करनाल और अंबाला सहित कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई जगहों पर लंबे समय तक बिजली नहीं आने के कारण घरों में इनवर्टर का बैकअप भी खत्म हो गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बिजली संकट के बीच हरियाणा सरकार ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। प्रदेश के बिजली मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार विवाद से जुड़े सभी मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार है। दूसरी ओर, बिजली कर्मचारियों का विरोध निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने के फैसले को लेकर जारी है।

गुरुग्राम में बिजली उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी, 12 घंटे में 3,000 से अधिक शिकायतें

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर गुरुग्राम में तेजी से दिखाई देने लगा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हड़ताल शुरू होने के बाद रात करीब 10 बजे से शहर के अलग-अलग इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें सामने आने लगीं। बिजली निगम के पास महज 12 घंटे के भीतर 3,000 से अधिक शिकायतें पहुंचने से स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

शिकायतों के आंकड़ों के मुताबिक, रात के दौरान बिजली निगम को करीब 945 शिकायतें मिलीं। इसके बाद सुबह के समय शिकायतों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई और महज दो घंटे के भीतर 2,245 शिकायतें दर्ज की गईं। बिजली आपूर्ति बाधित होने से संबंधित शिकायतें ऑनलाइन माध्यमों और कॉल सेंटर के जरिए भी लगातार प्राप्त होती रहीं।

शहर के विभिन्न हिस्सों में बिजली कटौती के कारण घरेलू कामकाज, पानी की आपूर्ति और व्यावसायिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई। लगातार बिजली नहीं मिलने से उन परिवारों की परेशानी अधिक बढ़ गई, जो इनवर्टर के सीमित बैकअप पर निर्भर हैं।

गुरुग्राम से अंबाला तक बिजली आपूर्ति प्रभावित

कर्मचारियों की हड़ताल का असर केवल गुरुग्राम तक सीमित नहीं रहा। प्रदेश के कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की खबरें सामने आई हैं। इनमें फरीदाबाद, नूंह, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, करनाल और अंबाला जैसे जिले भी शामिल हैं।

बिजली कटौती के कारण घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों, दुकानदारों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। बिजली पर निर्भर कामकाज प्रभावित होने से उत्पादन, सेवाओं और दैनिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा, बिजली आपूर्ति में व्यवधान का असर जलापूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

कुछ स्थानों पर बिजली कटौती से नाराज स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किए। लोगों की मांग है कि बिजली आपूर्ति जल्द बहाल की जाए, ताकि उन्हें गर्मी, पानी की कमी और रोजमर्रा के कामों में आ रही परेशानियों से राहत मिल सके।

बिजली मंत्री अनिल विज की अपील, बोले- सभी विकल्पों पर बातचीत को तैयार

बढ़ते बिजली संकट के बीच हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए कहा कि कर्मचारी हड़ताल समाप्त कर अपनी ड्यूटी पर लौटें। सरकार उनके साथ सभी विकल्पों पर बातचीत करने के लिए तैयार है।

मंत्री ने बातचीत के संभावित विकल्पों में इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई पर विचार करने की बात भी कही। सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब बिजली आपूर्ति में बाधा के कारण उपभोक्ताओं की परेशानियां बढ़ रही हैं।

सरकार की अपील का उद्देश्य कर्मचारियों और प्रशासन के बीच जारी गतिरोध को बातचीत के माध्यम से समाप्त करना तथा बिजली वितरण व्यवस्था को सामान्य बनाना है। हालांकि, कर्मचारियों की मांगों और सरकार के रुख के बीच सहमति बनने के बाद ही हड़ताल समाप्त होने की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

निजीकरण के विरोध में क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं बिजली कर्मचारी?

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का प्रमुख कारण बिजली वितरण क्षेत्र में निजी भागीदारी को लेकर उठाई जा रही आपत्तियां हैं। विवाद हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) द्वारा ‘इलेवन पावर’ को बिजली वितरण के लिए समानांतर लाइसेंस दिए जाने के फैसले से जुड़ा है।

कर्मचारियों का तर्क है कि निजी कंपनी को बिजली वितरण की अनुमति मिलने से सरकारी बिजली वितरण निगमों की स्थिति कमजोर हो सकती है। विशेष रूप से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के भविष्य और सरकारी व्यवस्था पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर कर्मचारियों ने चिंता जताई है।

कर्मचारियों का विरोध इसी आशंका के इर्द-गिर्द केंद्रित है कि निजी वितरण कंपनी के प्रवेश से मौजूदा सरकारी व्यवस्था, कर्मचारियों की भूमिका और बिजली वितरण के संचालन पर असर पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारी हड़ताल के जरिए अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

सरकार APTEL में चुनौती देगी HERC के फैसले को

बिजली वितरण के समानांतर लाइसेंस से जुड़े विवाद पर राज्य सरकार ने कानूनी विकल्प अपनाने की भी बात कही है। बिजली मंत्री अनिल विज के अनुसार, सरकार HERC के फैसले को अपीलीय न्यायाधिकरण फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) में चुनौती देगी।

सरकार की ओर से इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के साथ उसके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग किए जाने की बात कही गई है। इस कदम का उद्देश्य मामले पर कानूनी समीक्षा कराना और आगे की कार्रवाई तक फैसले के प्रभाव को रोकने की संभावना तलाशना है।

इस प्रकार, निजी वितरण कंपनी को लाइसेंस देने का मुद्दा अब कर्मचारियों के विरोध के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया से भी जुड़ गया है। सरकार की प्रस्तावित अपील और कर्मचारियों की मांगों पर होने वाली बातचीत आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

बिजली संकट के बीच आम लोगों को राहत मिलने का इंतजार

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से उत्पन्न स्थिति ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था और उपभोक्ताओं की परेशानियों को केंद्र में ला दिया है। गुरुग्राम में हजारों शिकायतों का दर्ज होना बताता है कि बिजली कटौती का असर बड़े पैमाने पर महसूस किया जा रहा है।

एक ओर कर्मचारी निजीकरण से जुड़े फैसले के विरोध में अपनी मांगों पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार बातचीत के जरिए गतिरोध समाप्त करने की कोशिश कर रही है। इस बीच आम उपभोक्ताओं की प्राथमिकता बिजली आपूर्ति की जल्द बहाली है।

अब सबकी नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है, तो हड़ताल समाप्त होने और बिजली व्यवस्था सामान्य होने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल, बिजली आपूर्ति की स्थिति और बातचीत के नतीजे ही तय करेंगे कि प्रदेश के प्रभावित जिलों के लोगों को राहत कब मिलती है।