UPI पर जल्द लग सकते हैं चार्ज: नीति आयोग उपाध्यक्ष का बड़ा बयान
UPI हमेशा मुफ्त नहीं रहेगा
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 (GFF 2026) में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लहिरी ने कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) हमेशा मुफ्त नहीं रह सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को टिकाऊ बनाने के लिए भविष्य में मामूली चार्ज लगाए जा सकते हैं।
क्यों जरूरी है चार्ज?
- ऑपरेटिंग लागत: UPI नेटवर्क को चलाने में सर्वर, सुरक्षा और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होता है।
- सस्टेनेबल मॉडल: फिनटेक कंपनियों को लंबे समय तक मुफ्त सेवा देना मुश्किल है, इसलिए उन्हें राजस्व का स्रोत चाहिए।
- कानूनी बदलाव: हाल ही में सरकार ने UPI पर जीरो-MDR की अनिवार्यता हटाई है, जिससे चुनिंदा हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने का रास्ता खुला है।
अशोक लहिरी का बयान
- उन्होंने कहा कि कोई तय समयसीमा नहीं है, लेकिन जितनी जल्दी चार्ज लागू होंगे उतना बेहतर होगा।
- चार्ज बहुत मामूली होंगे—हर ₹100 के ट्रांजैक्शन पर कुछ पैसे, यानी 1% से भी कम।
- भारतीय उपभोक्ता सेवा की गुणवत्ता और भरोसे को ज्यादा महत्व देते हैं, इसलिए मामूली शुल्क से उपयोग पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
संभावित असर
- मर्चेंट पेमेंट: दुकानदारों और व्यापारियों को ट्रांजैक्शन पर छोटा शुल्क देना पड़ सकता है।
- पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन: आम लोगों के बीच पैसे भेजना शायद मुफ्त ही रहे या न्यूनतम सीमा तक फ्री हो।
- फिनटेक निवेश: UPI को मोनेटाइज करने से नए निवेश और तकनीकी सुधार की संभावना बढ़ेगी।
उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया
- भारतीय आबादी का बड़ा हिस्सा क्वालिटी और भरोसेमंद सेवा को प्राथमिकता देता है।
- मामूली चार्ज से UPI का इस्तेमाल कम होने की संभावना नहीं है।
- यह कदम डिजिटल पेमेंट्स को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद करेगा।
UPI ने भारत में पेमेंट सिस्टम को बदल दिया है। अब इसे टिकाऊ बनाने के लिए मामूली शुल्क लगाना पड़ सकता है। सरकार ने पहले कहा था कि UPI मुफ्त रहेगा, लेकिन नीति आयोग के उपाध्यक्ष का बयान बताता है कि भविष्य में UPI पर चार्जेस लागू हो सकते हैं।










