बिजनौर पुलिस ने फर्जी HSRP वेबसाइट से देशभर में ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, युवती समेत 11 गिरफ्तार

फर्जी HSRP वेबसाइट बनाकर देशभर में ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा

बिजनौर पुलिस ने हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) की फर्जी वेबसाइट बनाकर देशभर में ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह में शामिल एक युवती समेत 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

एएसपी सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 11 शिकायतें दर्ज हुई थीं। जांच में सामने आया कि परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट की नकल कर एक फर्जी साइट बनाई गई थी, जिसके जरिए ग्राहकों से फीस वसूली जा रही थी। ग्राहक क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान करते थे और ठगों के खातों में पैसा पहुंच जाता था। गिरोह ने एटीएम से लगभग ढाई लाख रुपये निकाल लिए।

गिरफ्तार आरोपित

गिरफ्तार आरोपितों में शामिल हैं:

  • मेवा नवादा निवासी: मिराजुद्दीन, असद, मोहम्मद रिजवान, मोहम्मद इरफान, बिलाल
  • मकसूदपुर निवासी: नईम अहमद, परवेज
  • सूरानंगला निवासी: मोहम्मद शाकिब
  • सहसपुर चौधरियान निवासी: मोहम्मद समद
  • फैजुल्लापुर निवासी: अमजद अली
  • स्योहारा इस्लामनगर निवासी: इलमा चौधरी

बरामदगी

पुलिस ने आरोपितों के पास से भारी मात्रा में दस्तावेज और उपकरण बरामद किए:

  • 61 आधार कार्ड
  • 42 बैंक पासबुक
  • 10 चेकबुक
  • 33 एटीएम कार्ड
  • 15 वोटर आईडी कार्ड
  • 19 पैन कार्ड
  • 4 लैपटॉप, 2 प्रिंटर, 1 मॉनीटर
  • फिंगरप्रिंट मशीन
  • ₹1,20,000 नगद

ठगी का तरीका

  • फर्जी जनसेवा केंद्र खोलकर लोगों के आधार कार्ड बनवाए जाते थे।
  • खातों का इस्तेमाल लेनदेन के लिए किया जाता था और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले खाताधारकों को कमीशन का लालच दिया जाता था।
  • असद ने अपनी परचून की दुकान पर कंप्यूटर लगाकर लेनदेन का काम संभाला।
  • गिरोह ने अपनी बनाई वेबसाइट पर दावा किया कि वे मात्र ₹999 में अच्छी क्वालिटी की हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट देंगे।
  • सरकारी पोर्टल से कम फीस रखी गई थी, जिससे लोग भ्रमित होकर फर्जी साइट पर आवेदन कर देते थे।

पुलिस अभियान

एएसपी सिटी ने बताया कि डीजीपी के आदेश पर सात दिन तक साइबर वज्र अभियान चलाया जाएगा। इसी अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। टीम में एएसपी गौतम राय, धामपुर कोतवाल रविंद्रप्रताप और स्योहारा एसओ संजय तोमर शामिल रहे।

यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के बढ़ते नेटवर्क पर बड़ी चोट मानी जा रही है। यह मामला दिखाता है कि कैसे लोग कम फीस और आसान प्रक्रिया के लालच में ठगी का शिकार हो जाते हैं।