बिजनौर में मालन नदी का कहर: चार गांव जलमग्न, ग्रामीण तटबंध पर शरण लेने को मजबूर

बिजनौर जनपद में मालन नदी का पानी लगातार बढ़ने से चार गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। पहाड़ों पर हो रही तेज बरसात से नदी का जलस्तर कम होने के बजाय और बढ़ गया है। इसका दबाव हरिद्वार मार्ग से हटकर खादर क्षेत्र की ओर बढ़ गया है, जिससे गांव रावली की नई बस्ती समेत कई इलाकों में पानी भर गया है।

ग्रामीणों की झोपड़ियों के चारों ओर पानी ही पानी है। मजबूर होकर लोग अपने घर छोड़कर गंगा के तटबंध पर तिरपाल डालकर रहने लगे हैं। हजारों बीघा खेती जलमग्न हो चुकी है। वहीं हरिद्वार मार्ग पर पानी कम होने के बाद लगभग 24 घंटे बंद रहा यातायात शनिवार सुबह से सुचारू कर दिया गया।

रपटे पर नाव का सहारा

शुक्रवार को रावली-शहजादपुर रपटे पर तीन फीट पानी बहने लगा। लोगों को रपटा पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा। इसी दौरान बिना नाव के पार करने की कोशिश कर रहे एक व्यक्ति को मालन नदी बहा ले गई। उसका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।

प्रशासन की चुनौतियां

शुक्रवार सुबह मालन का पानी हरिद्वार-बिजनौर मार्ग पर गांव गजरौला शिव के सामने सड़क पर उतरने लगा था। प्रशासन ने तत्काल वाहनों को रोककर उन्हें वाया किरतपुर भेजना शुरू किया। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार बाढ़ आने पर उन्हें विस्थापित होना पड़ता है, लेकिन प्रशासन उनकी सुरक्षा और पुनर्वास के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं करता।

ग्रामीणों की पीड़ा

रावली की नई बस्ती गंगा के तटबंध के ठीक दूसरी ओर है। यहां रहने वाले लड्डन, सलीम, आरिफ, इकरार, शाहवेज, घनश्याम, नाथा, गोविंदर, प्रकाश, शाहरूख आदि ने बताया कि हर बार मालन की बाढ़ उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर देती है। इस बार भी वे तिरपाल डालकर तटबंध पर रह रहे हैं।

खेत और मकान जलमग्न

पानी आने से ग्रामीण खेतों में नहीं जा पा रहे हैं। कई गांवों की सड़कों पर पानी बह रहा है और कुछ मकानों के अंदर भी पानी घुस गया है। हालांकि गंगा में पानी अभी कम है। शनिवार सुबह गंगा में मात्र 59 हजार क्यूसेक पानी बह रहा था। बरसात का अतिरिक्त पानी भीमगौड़ा बैराज में ही रोका जा रहा है।

यह घटना एक बार फिर प्रशासनिक तैयारी और ग्रामीणों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। हर साल मालन नदी की बाढ़ से प्रभावित होने वाले इन गांवों के लिए स्थायी समाधान की आवश्यकता है।