जिला कारागार में फिर बुझा एक बंदी की जिंदगी का चिराग
दीपक की आत्महत्या के सातवें दिन बंदी अरुण की अचानक मौत से जेल प्रशासन में मचा हड़कंप मचा
बिजनौर (चिंगारी)। जिला कारागार में एक बार फिर मातम पसरा हुआ है। अभी 10 मई को सजायाफ्ता कैदी दीपक द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की घटना की गूंज थमी भी नहीं थी कि शनिवार सुबह जेल से एक और दर्दनाक खबर सामने आ गई।
मेरठ निवासी बंदी अरुण कुमार की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। लगातार हो रही इन घटनाओं ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार मेरठ के शास्त्री नगर निवासी अरुण कुमार (45 वर्ष) पुत्र बृजकिशोर चोरी के एक मामले में गत 13 अप्रैल से जिला कारागार में बंद था। उसे बिजनौर थाने से जेल भेजा गया था।
वह जेल की बैरक नंबर-2 में निरुद्ध था।जेलर रविन्द्र नाथ ने बताया कि शनिवार सुबह रोजाना की तरह अरुण कुमार ने नाश्ता किया, लेकिन कुछ ही देर बाद उसने अचानक बेचैनी और घबराहट की शिकायत की। साथी बंदियों ने जब उसकी हालत बिगड़ती देखी तो जेल प्रशासन को सूचना दी।
आनन-फानन में उसे जेल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया।हालांकि कुछ समय तक चले उपचार के बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। स्थिति गंभीर देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जिंदगी की जंग हारते हुए अरुण कुमार ने दम तोड़ दिया।बंदी की मौत की खबर मिलते ही जेल प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना पर शहर कोतवाली पुलिस तत्काल अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों ने अस्पताल और जेल प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। वहीं, घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
लगातार दूसरी घटना के बाद जिला कारागार का माहौल एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। जेल में बंद कैदियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों का कहना है कि आखिर दस दिन के भीतर दो-दो घटनाएं होना कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है।








