विपक्ष के विनाश का समय आ गया- अशोक कटारिया, वीडियो देखें:-


नारी वंदन अधिनियम को लेकर विधान परिषद में गरजे अशोक कटारिया

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बिजनौर (बि.टा.)। गुरूवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा के दोनों सदनों के एक दिवसीय विशेष सत्र में नारी सशक्तिकरण पर चर्चा में भाग लेते हुए विधान परिषद सदस्य अशोक कटारिया ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने के लिए समूचे विपक्ष को आड़े हाथों लिया।
श्री कटारिया ने अपने ओजस्वी सम्बोधन में दो टूक कहा कि तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों के विनाश का समय निकट आ गया है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कृति रश्मिरथी की पंक्ति जब नाश मनुष्य पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है, का उल्लेख करते हुए कहा कि जो नारी का अपमान करता है, वो समाप्त हो जाता है।
श्री कटारिया ने कहा कि भारत में नारी की पूजा की जाती है। ये हमारी प्राचीन संस्कृति है। ये हमारे जीवन मूल्य है। अर्धनारीश्वर की प्रेरणा रखने वाला यह राष्ट्र महिलाओं के अपमान को बर्दाश्त नहीं कर सकता। उन्होने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी जी इस अधिनियम को लेकर आए तो गांव, गलियारों, चौराहों, चौबारों पर हमारी बेटियां, बहनें, हमारी नारियां खिलखिलाने लगीं। उन्हें लगा कि अब देश चलाएंगे, कानून बनाएंगे, हममें से अहिल्याबाई होल्कर निकलेंगी, हममें से सावित्रीबाई फुले निकलेंगी, हमारा समय आयेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह कौरवों ने मिलकर अभिमन्यु का वध किया था, उसी तरह विपक्ष ने मेजें थपथपाकर नारी वंदन अधिनियम की हत्या की है। लेकिन जब इनसे महिलाएं सवाल पूछेंगी, तब इनसे जवाब देते नहीं बनेगा।
उन्होंने कहा कि जिस देश की संस्कृति में स्त्री की पूजा होती है, वहां तथाकथित धर्म निरपेक्ष दलों ने महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित करने का पाप किया है। उन्होंने कहा कि मैं इन्हें धर्मनिरपेक्ष भी नहीं मानता, ये देश के विरोधी हैं, ये देश की संस्कृति के विरोधी है। ये केवल वोटों के भूखे हैं। अब इनके जाने का समय आ गया है। ये भारत की संसद से भी जाएंगे और विधानसभाओं से भी जाएंगे।
पूर्व मंत्री अशोक कटारिया ने विपक्ष पर बरसते हुए कहा कि हिन्दुस्तान बहुसंख्यको के विरोध में ये पहले से काम कर रहे थे, लेकिन अब ये दैवीय शक्ति, नारी शक्ति के विरोध में भी आ खड़े हुए हैं। इनका विनाश सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो भी कमिटमेंट करते हैं, उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। हमारे नेता में दम है। हमारे नेता ने कष्ट देखा है, भोगा है और जीया भी है। उन्होंने सदन के माध्यम से विपक्ष का आह्वान किया कि अब भी समय है, इस बिल के समर्थन में आ जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि ईश्वर विपक्ष को सद्बुद्धि दें ताकि उसका विनाश होने से बच जाए।
श्री कटारिया ने अपने सारगर्भित सम्बोधन में जहां देश की संस्कृति और नारी शक्ति के सम्मान को रेखांकित किया, वहां ऐतिहासिक संदर्भो का हवाला देते हुए विपक्ष को आड़े हाथों लिया। सदन में उनका भाषण बहुत गंभीरता के साथ सुना गया।