धामपुर का तालाब अमृत सरोवर योजना के बावजूद बदहाली में
धामपुर: प्रदेश सरकार द्वारा जल संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत प्राइवेट बस स्टैंड के पास स्थित तालाब का सौंदर्यकरण कराने हेतु सपा और भाजपा सरकारों के कार्यकाल में कुल 90 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी।
योजना का उद्देश्य था कि तालाब को न केवल जल संरक्षण का केंद्र बनाया जाए, बल्कि इसे स्थानीय नागरिकों के लिए आकर्षण स्थल भी विकसित किया जाए। इसके लिए सौंदर्यकरण, साफ-सफाई, किनारों की मरम्मत और हरियाली बढ़ाने जैसे कार्य प्रस्तावित किए गए थे।
लेकिन भारी भरकम बजट खर्च होने के बावजूद तालाब की स्थिति आज भी दयनीय बनी हुई है। तालाब में गंदगी और जलभराव की समस्या जस की तस है। आसपास की दीवारें और किनारे टूट-फूट का शिकार हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब की देखरेख और रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरती गई है।
नागरिकों का आरोप है कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों पर दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में तालाब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यह स्थिति न केवल सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है, बल्कि जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
धामपुर का यह तालाब अमृत सरोवर योजना की असफलता का उदाहरण बन गया है। करोड़ों की राशि खर्च होने के बावजूद यदि तालाब की हालत सुधर नहीं पाई, तो यह प्रशासनिक उदासीनता और योजनाओं के क्रियान्वयन में खामियों को उजागर करता है।








