खिरनी भूमि विवाद पर बढ़ा सियासी तापमान भाकियू ने भाजपा नेताओं को पत्र देकर पूछा- भारतेन्द्र के साथ हो या पीड़ित विधवा के …

27 अप्रैल को गन्ना काटने की चेतावनी

बिजनौर (चिंगारी)। खिरनी भूमि विवाद को लेकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है।

जिलाधिकारी को ज्ञापन देने के एक दिन बाद शनिवार को संगठन ने भाजपा नेताओं को पत्र सौंपकर उनका रुख स्पष्ट करने की मांग की है।जिलाध्यक्ष नितिन कुमार सिरोही के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों ने भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान ‘बॉबी’ को पत्र देकर पूछा है कि पार्टी इस मामले में पूर्व सांसद/पूर्व विधायक कुंवर भारतेंद्र सिंह के साथ है या न्यायालय के आदेशों के अनुसार विधवा संगीता को न्याय दिलाने वालों के साथ। संगठन ने सदर विधायक सूची चौधरी समेत अन्य जनप्रतिनिधियों को भी इसी आशय के पत्र भेजे हैं।गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले शुक्रवार को भाकियू अराजनीतिक के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर न्यायालय के आदेशों का तत्काल पालन कराने की मांग की थी। साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो 27 अप्रैल को संगठन के कार्यकर्ता खिरनी गांव पहुंचकर पीड़िता संगीता के खेत में खड़ी गन्ने की फसल काटेंगे।संगठन का आरोप है कि न्यायालय द्वारा संगीता के पक्ष में स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद प्रशासन उन्हें लागू कराने में विफल रहा है, जिससे किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि भाकियू अराजनीतिक पूरी तरह गैर-राजनीतिक संगठन है और सरकार के जनहित व किसान हितैषी कार्यों की सराहना करता रहा है।हालांकि संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला और कानून-व्यवस्था बिगड़ी या राजनीतिक नुकसान हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की होगी। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुंवर भारतेंद्र सिंह कथित भूमाफियाओं का साथ देकर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को कमजोर कर रहे हैं।इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष संकेंद्र प्रताप सिंह, नहटौर विधायक ओम कुमार, धामपुर विधायक अशोक राणा और बढ़ापुर विधायक कुंवर सुशांत सिंह को भी पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की गई है।भाकियू अराजनीतिक ने साफ कहा है कि यदि 27 अप्रैल तक न्याय नहीं मिला, तो संगठन के कार्यकर्ता “सर पर कफन बांधकर” खिरनी पहुंचेंगे और न्यायालय के आदेशों का पालन कराते हुए गन्ने की फसल काटेंगे।खिरनी का यह भूमि विवाद अब केवल एक किसान का मामला नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासन, राजनीति और न्यायिक आदेशों के पालन की बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है, जिससे जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।