नोएडा हिंसा मामले में बड़ा खुलासा: QR कोड से बने WhatsApp ग्रुप, भड़काऊ संदेशों से भड़के प्रदर्शनकारी

नोएडा में फैक्ट्री श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच में पुलिस को चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। जांच में सामने आया है कि प्रदर्शनकारियों को संगठित करने और उकसाने के लिए WhatsApp ग्रुप का इस्तेमाल किया गया। इन ग्रुप्स में लोगों को जोड़ने के लिए QR कोड का सहारा लिया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिक रातों-रात इन ग्रुप्स का हिस्सा बन गए।

WhatsApp ग्रुप्स का नेटवर्क

  • जांच में कई WhatsApp ग्रुप्स का पता चला है, जिनमें से एक का नाम “मजदूर आंदोलन” बताया जा रहा है।
  • अलग-अलग नामों से बनाए गए इन ग्रुप्स में श्रमिक यूनियनों से जुड़े लोगों को जोड़ा गया।
  • इन ग्रुप्स में लगातार संदेश भेजे गए, जिनमें प्रदर्शन को उग्र बनाने और हिंसा भड़काने की अपील की गई।

भड़काऊ पोस्ट और डिजिटल सबूत

  • पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इन WhatsApp ग्रुप्स में भड़काऊ पोस्ट और उकसाने वाले संदेश डाले गए थे।
  • गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में इन ग्रुप्स और संदेशों के सबूत मिले हैं।
  • डिजिटल फॉरेंसिक टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन ग्रुप्स को किसने बनाया और किसने QR कोड के जरिए लोगों को जोड़ा।

जांच का फोकस

  • पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन ग्रुप्स के पीछे कौन लोग थे और उनका उद्देश्य क्या था।
  • यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह हिंसा पूर्व नियोजित थी और क्या इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका रही।

नोएडा हिंसा मामले ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर भीड़ को संगठित करने और भड़काने के लिए किया जा सकता है। QR कोड के जरिए WhatsApp ग्रुप्स में लोगों को जोड़ना एक नई रणनीति के रूप में सामने आया है, जिसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है।