बिजनौर में अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी पर आयोजित कार्यक्रम में राम मंदिर आंदोलन और उनके योगदान को किया गया याद, चंपत राय भी रहे मौजूद

राम मंदिर राजनीति नहीं, आस्था का विषय था: बिजनौर में बोले सतीश महाना, ‘अशोक सिंघल के आशीर्वाद से 8 बार विधायक बना’

बिजनौर। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के अवसर पर बिजनौर के नुमाइश मैदान में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय सहित अन्य लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान वक्ताओं ने अशोक सिंघल के जीवन, उनके सामाजिक एवं धार्मिक योगदान और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।

बिजनौर नुमाइश ग्राउंड में सभा को संबोधित करते राजेश्वराश्रम महाराज…

कार्यक्रम में सतीश महाना ने राम मंदिर को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं था, बल्कि यह सनातन परंपरा, धार्मिक विश्वास और लोगों की भावनाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आंदोलन था। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण लंबे समय तक चले संघर्ष, समर्पण और असंख्य रामभक्तों के योगदान का परिणाम है।

‘अशोक सिंघल के आशीर्वाद से आठ बार विधायक बना’

सतीश महाना ने अशोक सिंघल के साथ अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके जीवन और राजनीतिक सफर में अशोक सिंघल का आशीर्वाद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वह आठ बार विधायक बने और इसके पीछे अशोक सिंघल का आशीर्वाद भी उनके लिए मायने रखता है।

बिजनौर नुमाइश ग्राउंड में सभा को संबोधित करते उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना…

उन्होंने स्वयं को राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ा रामभक्त बताते हुए कहा कि वह इस आंदोलन को शुरुआत से करीब से देखते और उससे जुड़े रहे हैं। उनके अनुसार, राम मंदिर का निर्माण उन लोगों की आस्था, त्याग और लंबे समय तक किए गए प्रयासों का प्रतीक है, जिन्होंने मंदिर निर्माण के संकल्प को जीवित रखा।

राम मंदिर आंदोलन में अशोक सिंघल की भूमिका को किया याद

कार्यक्रम में अशोक सिंघल के योगदान पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका को याद किया। विहिप के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अशोक सिंघल आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल रहे थे। उन्होंने मंदिर निर्माण के समर्थन में जनजागरण और विभिन्न धार्मिक संगठनों को एकजुट करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

वक्ताओं ने कहा कि अशोक सिंघल का जीवन धार्मिक आस्था, संगठन और अपने विचारों के प्रति समर्पण के संदर्भ में याद किया जाता है। जन्म शताब्दी के मौके पर उनके कार्यों और आंदोलन से जुड़ी स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।

राम मंदिर के विरोध को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना

अपने संबोधन में सतीश महाना ने राम मंदिर को लेकर पूर्व में विरोध जताने वाले राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन दलों ने कभी राम मंदिर के निर्माण का विरोध किया या राम के अस्तित्व को लेकर सवाल उठाए, वे आज इस विषय पर राजनीति कर रहे हैं।

उन्होंने राम मंदिर निर्माण को श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा की पूर्ति के रूप में प्रस्तुत किया। उनके मुताबिक, इस ऐतिहासिक प्रक्रिया में लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं और अनेक लोगों का योगदान जुड़ा रहा है।

आस्था, समर्पण और आंदोलन की विरासत पर चर्चा

बिजनौर नुमाइश ग्राउंड में सभा को संबोधित करते चंपत राय…

बिजनौर में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अशोक सिंघल के जीवन और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े उनके योगदान को याद करना रहा। कार्यक्रम के दौरान राम मंदिर निर्माण के पीछे रहे लंबे संघर्ष, धार्मिक आस्था और सामाजिक लामबंदी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित इस आयोजन ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को फिर से चर्चा में ला दिया। कार्यक्रम में शामिल वक्ताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए उनके जीवन से जुड़ी घटनाओं और आंदोलन की विरासत पर अपने विचार साझा किए।