सोती हत्याकांड : दिल्ली के वकील राजनारायण सिंह की अग्रिम जमानत खारिज
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी-सच सामने लाने के लिए हिरासत में पूछताछ ज़रूरी
बिजनौर (चिंगारी)। 182 वर्षीय अनिल कुमार सोती हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सह-आरोपी दिल्ली के अधिवक्ता राजनारायण सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने घटना की गंभीरता और पुलिस जांच में सामने आए साक्ष्यों को देखते हुए राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि साजिश का सच सामने लाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अनिल सोती और उनके भतीजे गौरव सोती के बीच संपत्ति विवाद चल रहा था। आरोप है कि राजनारायण सिंह विवादित जमीन बिकवाकर कमीशन कमाना चाहते थे। अनिल सोती के जमीन बेचने से इनकार करने पर उन्होंने अपनी क्लर्क निशा उर्फ अंजुम परवीन के जरिए हत्या की साजिश रची। उन पर क्लर्क को कथित तौर पर 10 लाख रुपये की सुपारी देने और 80 हजार रुपये अग्रिम भुगतान करने का आरोप है। शुरुआती एफआईआर में राजनारायण का नाम नहीं था, लेकिन क्लर्क के कबूलनामे में उनकी भूमिका सामने आने का दावा किया गया।
आठ बार रेकी, 28 बार फोन पर बातचीत
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर सात गंभीर चोटें मिलीं और मौत का कारण गला घोंटना बताया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी राजनारायण 31 जनवरी से 28 जून 2026 के बीच आठ अलग-अलग जगहों पर घटनास्थल के आसपास गया था। उनकी क्लर्क निशा से 28 बार फोन पर बातचीत हुई। हत्या से एक दिन पहले, 5 अगस्त को भी दोनों के बीच 40 सेकंड तक बात हुई थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे। मोबाइल फोन बंद कर फरार हैं और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहे हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि मामला जांच के शुरुआती चरण में है और आरोप गंभीर हैं। अदालत ने सवाल उठाया कि दिल्ली में वकालत करने वाले आरोपी बार-बार मृतक की संपत्ति से जुड़े स्थान पर क्यों जा रहे थे। बचाव पक्ष के आरोपी को झूठा फंसाए जाने का आधार साबित नहीं कर सका। अदालत ने प्रारंभिक जांच में पर्याप्त आधार मानते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
डेढ़ महीने बाद भी गिरफ्तारी नहीं
अनिल सोती की हत्या 6 अगस्त 2026 को उनके आवास पर हुई थी। पुलिस ने 18 अगस्त को निशा उर्फ अंजुम परवीन समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि राजनारायण सिंह तभी से फरार हैं। इससे पहले 11 सितंबर को बिजनौर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार आसम ने भी उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
करीब डेढ़ महीने बाद भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट हासिल करने और संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी शुरू नहीं हुई थी। खबरों में गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रभावशाली लोगों के जरिए पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनवाने के आरोप भी सामने आते रहे हैं।








