मेरठ में फेक करेंसी गिरोह का खुलासा, दो पुलिसकर्मियों समेत 5 गिरफ्तार – गड्डी में ऊपर-नीचे असली नोट, बीच में कागज की कटिंग

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में नकली नोटों के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले एक गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। भावनपुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में थाने में तैनात दो सिपाही और एक हिस्ट्रीशीटर भी शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से 500, 200 और 100 रुपये के नोटों की 33 गड्डियां तथा करीब 25 हजार रुपये की असली नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

दो पुलिसकर्मियों की भूमिका से पुलिस महकमे में हड़कंप

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में भावनपुर थाने में तैनात 2025 बैच के दो सिपाहियों के नाम सामने आए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में सिपाही आशीष कुमार और प्रश्नचित्त आनंद बताए गए हैं। इनके साथ हिस्ट्रीशीटर साजिद उर्फ पिस्टल समेत अन्य आरोपियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों पुलिसकर्मी कथित तौर पर इस गिरोह के संपर्क में कैसे आए और उनकी भूमिका किस स्तर तक थी। मामले की जांच के दौरान पुलिस आरोपियों के बीच संपर्क, लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।

असली नोटों के बीच कागज की कटिंग डालकर तैयार होती थी गड्डी

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह लोगों को कम रकम के बदले कई गुना अधिक रकम देने का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। ठगी के लिए ऐसी गड्डियां तैयार की जाती थीं, जिन्हें देखने पर पहली नजर में नोटों की पूरी गड्डी जैसा प्रतीत होता था।

बताया जा रहा है कि गड्डी के सबसे ऊपर और सबसे नीचे असली नोट लगाए जाते थे, जबकि इनके बीच कागज की कटिंग रखी जाती थी। इस तरीके से तैयार गड्डी बाहर से देखने में असली नोटों की गड्डी जैसी लगती थी। इसी भ्रम का फायदा उठाकर आरोपियों द्वारा लोगों से रकम ऐंठने का आरोप है।

500, 200 और 100 रुपये के नोटों की 33 गड्डियां बरामद

एसपी ग्रामीण अभिजीत कुमार के अनुसार, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोटों की कुल 33 गड्डियां बरामद की हैं। इनमें 500, 200 और 100 रुपये के नोट शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा करीब 25 हजार रुपये की असली नकदी भी बरामद होने की जानकारी दी गई है।

पुलिस अब बरामद गड्डियों और नोटों की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इनका इस्तेमाल किन लोगों के साथ ठगी में किया गया था और इस पूरे खेल में आरोपियों का तरीका क्या था।

कितने लोगों को बनाया शिकार, इसकी जांच जारी

गिरोह के खुलासे के बाद पुलिस के सामने अब कई अहम सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपी अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगा रही है कि गिरोह में कितने सदस्य सक्रिय थे और नकली नोटों के नाम पर ठगी का यह नेटवर्क कब से चल रहा था।

पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर उनके संपर्क में रहे लोगों और संभावित सहयोगियों की जानकारी जुटा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

मेरठ से बाहर भी फैला है नेटवर्क?

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क केवल मेरठ तक सीमित था या इसके तार दूसरे जिलों और राज्यों से भी जुड़े हुए हैं। जांच टीम आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर तैयार की गई इन गड्डियों का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों के संपर्क में मेरठ के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों या दूसरे राज्यों के लोग तो नहीं थे। हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में फेक करेंसी से जुड़े मामले सामने आने के बाद मेरठ के इस मामले को लेकर भी पुलिस विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है।

पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी होगी जांच

मामले में दो पुलिसकर्मियों के नाम सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर भी जांच महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों सिपाहियों की कथित भूमिका क्या थी और क्या उन्होंने गिरोह को किसी तरह की मदद या जानकारी उपलब्ध कराई थी।

फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ और बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में गिरोह के संचालन, ठगी की रकम और आरोपियों की वास्तविक भूमिका को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।