उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था का नया अध्याय :- मदरसा बोर्ड समाप्त, लागू होंगे स्कूलों वाले नियम
उत्तराखंड में 1 जुलाई 2026 से मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लागू हो गया है। राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, 30 जून 2026 को उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया। अब सभी पंजीकृत मदरसों की निगरानी, मान्यता, पाठ्यक्रम और प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण को सौंप दी गई है।
यह कदम उत्तराखंड को देश का पहला राज्य बनाता है जिसने मदरसों के पारंपरिक स्वरूप को बदलकर उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था में क्या बदलेगा?
- NCERT आधारित पाठ्यक्रम: अब सभी मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा मानकों के अनुरूप विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे।
- स्कूल नियम लागू: मदरसों पर वही नियम और मानक लागू होंगे जो सामान्य स्कूलों पर लागू होते हैं।
- मान्यता अनिवार्य: राज्य के सभी मदरसों को मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा। गैर-पंजीकृत मदरसों पर बंद होने का संकट मंडरा रहा है।
- प्राधिकरण की निगरानी: पाठ्यक्रम, प्रशासन और मान्यता की पूरी जिम्मेदारी राज्य अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण के पास होगी।
- सख्त कार्रवाई: नियमों का पालन न करने वाले मदरसों को बंद किया जा सकता है।
आंकड़ों की तस्वीर
- उत्तराखंड में लगभग 60,000 से 70,000 छात्र मदरसों में पढ़ते हैं।
- करीब 500 मदरसे बिना मान्यता के वर्षों से संचालित हो रहे हैं।
- नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन गैर-पंजीकृत मदरसों पर बंद होने का खतरा बढ़ गया है।
सरकार का संदेश
राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मदरसों को अब केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्हें आधुनिक शिक्षा से जोड़ना आवश्यक है ताकि छात्र मुख्यधारा में प्रतिस्पर्धा कर सकें।
उत्तराखंड का यह कदम शिक्षा सुधार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल है। इससे न केवल मदरसों का स्वरूप बदलेगा बल्कि हजारों छात्रों को आधुनिक शिक्षा का लाभ मिलेगा। यह बदलाव धार्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा के संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







