उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार कोई आईएएस अफसर होगा बर्खास्त !

हरिद्वार नगर निगम के 58 करोड़ रुपये के घोटाले में मुख्यमंत्री ने उठाया बड़ा कदम

चिंगारी सांध्य दैनिक ने किया था घोटाले का भण्डाफोड़

हरिद्वार नगर निगम के 58 करोड़ रुपए ठिकाने लगाने वाले आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी को बर्खास्त करने की संस्तुति मुख्यमंत्री द्वारा कर दिए जाने के बाद राज्य में भूचाल आ गया है। उत्तराखंड के इतिहास में यह पहला मामला है, जिसमें मुख्यमंत्री ने इतना कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री धामी ने यह कदम उठाकर राज्य की जनता व अधिकारियों को यह बता दिया है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

IAS VARUN CHAUDHARY

वरूण चौधरी कारगुजरियां तभी से चल रही थीं, जब से वे हरिद्वार आए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार स्थित हर की पैड़ी पर कई हजार दीपक जलाकर हरिद्वार की हर की पैड़ी के इतिहास में एक रिकॉर्ड बनाया था। इस कार्य में भी वरुण चौधरी ने खेल कर दिया था। दीपक, तेल व रूई की बत्तियां खरीदने के नाम पर भी घोटाला हुआ था। उसी दिन लग गया था कि वरुण चौधरी के ऊपर मां गंगा की निगाह तो कोई न कोई गुल खिलाकर रहेगी, लेकिन वरुण चौधरी ने नगर आयुक्त हरिद्वार रहते हुए नगर निगम के 58 करोड़ रुपए ठिकाने लगा दिये, जिसमें अपने साथ एक दर्जन अधिकारियों को और लपेट लिया |

नगर निगम हरिद्वार के तत्कालीन नगर आयुक्त रहे वरुण चौधरी कौड़ियों की भूमि करोड़ों में खरीदकर पैसे की लूट करके हरिद्वार से चुपचाप निकलकर देहरादून सचिवालय में जाकर बैठ गए। लेकिन जब ऊपर वाले की निगाह टेढ़ी होती है, तो आप 7 तालों में जाकर बैठ जाएं, वह छोड़ता नहीं है यही हाल वरुण चौधरी के साथ हुआ। वरुण चौधरी के ऊपर तमाम तरह के भ्रष्टाचार के आरोप तो काफी पहले से लग रहे थे, लेकिन उस समय नगर निगम में अकेले वरुण चौधरी का ही राज था, हालांकि उस समय नगर निगम के प्रशासक तत्कालीन जिलाधिकारी थे।


हरिद्वार नगर निगम घोटालाः धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई
डीएम कर्मेंद्र सिंह, एसडीएम सदर अजय वीर और नगर आयुक्त रहे वरुण चौधरी समेत कुल 12 लोग सस्पेंड। अब विजिलेंस करेंगे ज़मीन घोटाले की जांच।

बीजेपी बोर्ड ने पकड़ी वरुण चौधरी की लूट

कागजों में वरुण चौधरी की कारगुजारी उस समय पकड़ में आई जब नगर निगम में बीजेपी का ही बोर्ड बन गया और बीजेपी की मेयर किरण जैसल व सारे पार्षदों ने इस महा घोटाले की जांच की मांग की। इसकी भनक जैसे ही चिंगारी सांध्य दैनिक को लगी तो चिंगारी ने प्रमुखता से वरुण चौधरी का नाम लिखते हुए यह खबर प्रकाशित की।


शायद चिंगारी को भी इसकी भनक नहीं लगती, लेकिन भनक लगते ही जब चिंगारी ने अपना कर्तव्य निभाते हुए इस लूट का खुलासा किया तो हड़कंप मच गया। एक साल बीत जाने के बाद अब जाकर बड़ी कार्यवाही की हरी झंडी मुख्यमंत्री द्वारा दी गई है।

धमकी दी थी या तो ख़बर का खंडन छापो नहीं तो मुकदमा करूंगा

इस खबर के प्रकाशित होते ही हड़कंप मच गया था। वरुण चौधरी ने हरिद्वार के कुछ अपने चहते पत्रकारों के जरिए प्रेस कांफ्रेंस कर बाकायदा धमकी दी कि मैं चिंगारी और उसके संवाददाता नरेश गुप्ता के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करूंगा। इस खबर का खंडन करें।


वरुण चौधरी को शायद पता नहीं होगा कि चिंगारी की खबरें तथ्यों पर आधारित होती हैं, इसलिये माफी मांगने का सवाल ही नहीं होता। हालांकि वरुण चौधरी के बयान के बाद हरिद्वार के कुछ कलमकारों की बांछे खिल गई। उन्हें लगा कि अब तो नरेश गुप्ता गए। मुख्यमंत्री अगले दिन को फिर इस घोटाले की जांच के आदेश देने पड़े और वरूण चौधरी को निलंबित किया गया।

एक साल तक चली जांच

एक साल तक जांच चली। पहले आईएएस रणवीर चौहान, फिर विजिलेंस फिर चीफ सेक्रेटरी के नेतृत्व में जांच, फिर विशेष ऑडिट जांच व कई तरीके की जांच होती रही। और वरुण चौधरी व उसकी टीम घेरे में आती रही। जो लोग वरुण चौधरी को बचाने का प्रयास कर रहे थे, उनको भी हथियार डालने पड़े और मामला सबके सामने है।

नगर निगम बोर्ड की प्रमुख भूमिका रही

इस प्रकरण में महत्वपूर्ण भूमिका नगर निगम हरिद्वार की मेयर किरण जेशल व बोर्ड के पार्षदों की रही। इन लोगों ने पहली बैठक में ही साफ-साफ शब्दों में कह दिया था कि इस प्रकरण की जांच कराई जाए, अन्यथा इस प्रकरण को हम हाईकोर्ट तक लेकर जाएंगे। यदि यह मामला बोर्ड की मेयर व भाजपा पार्षद नहीं उठाते तो…

मुख्यमंत्री की छवि में इस कार्यवाही से आया निखार

इस प्रकरण ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की छवि को निखारने का काम किया है। यदि मुख्यमंत्री इसी तरह भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों को पनिशमेंट देने का काम करेंगे तो राज्य में पुनः बीजेपी की सरकार आने से कोई नहीं रोक पाएगा। लेकिन इसके लिए मुख्यमंत्री को निरंतर कार्यवाही करते रहनी होगी, और अपने अधीनस्थ अधिकारियों, कर्मचारियों व मंत्रियों तक पर निगाह रखनी होगी।

नगर निगम के 58 करोड़ की रिकवरी कैसे और किससे होगी?

सबसे प्रमुख बात यह है कि यह सारी कार्यवाही तो हो ही रही है, लेकिन नगर निगम के 58 करोड़ रुपए की रिकवरी कैसे होगी। यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न बना हुआ है। वरुण चौधरी के साथ इस खेल में और कौन-कौन मिला हुआ था, इसकी जांच भी अगर हो जाए तो लोग भौंचक्के रह जाएंगे।

इन पर आयी आंच

वरुण चौधरी की बर्खास्तगी की संस्तुति व तत्कालीन जिलाधिकारी कमरेंद्र सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश मुख्यमंत्री द्वारा दिये गये हैं। अब यह एफआईआर क्या गुल खिलाती है, किस-किस को जेल होती है यह देखना है।