गंगा एक्सप्रेसवे हरिद्वार विस्तार: टोल अधिकार पर उत्तर प्रदेश–उत्तराखंड में पेच

देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार अब निर्णायक मोड़ पर है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के बीच जल्द ही एमओयू (समझौता ज्ञापन) होने वाला है, लेकिन उससे पहले दोनों राज्यों के बीच यह तय होना बाकी है कि उत्तराखंड में आने वाले हिस्से का निर्माण कौन करेगा और उस पर टोल वसूली का अधिकार किसके पास रहेगा।

परियोजना का महत्व

  • गंगा एक्सप्रेसवे वर्तमान में मेरठ से प्रयागराज तक लगभग 594 किलोमीटर लंबा है।
  • यह 12 जिलों को जोड़ता है और उत्तर भारत की सबसे तेज़ सड़क कनेक्टिविटी का हिस्सा है।
  • हरिद्वार विस्तार के तहत अमरोहा से नया कॉरिडोर निकलेगा, जो बिजनौर होते हुए हरिद्वार पहुंचेगा।
  • प्रस्तावित विस्तार की लंबाई लगभग 146 किलोमीटर होगी, जिसमें से 25–30 किलोमीटर हिस्सा उत्तराखंड में आएगा।

भूमि अधिग्रहण और प्रगति

  • अमरोहा में यूपीडा ने 62 गांवों के बंदोबस्ती नक्शे तलब किए हैं।
  • बिजनौर में 117 गांवों को प्रस्तावित अलाइनमेंट में शामिल किया गया है।
  • हरिद्वार में लगभग 25 गांव इस परियोजना के प्रभाव क्षेत्र में आएंगे।
  • दोनों राज्यों के बीच अलाइनमेंट को लेकर प्रारंभिक सहमति बन चुकी है।

असली पेच: 30 किलोमीटर का हिस्सा

उत्तराखंड में आने वाले लगभग 30 किलोमीटर हिस्से को लेकर दो विकल्पों पर विचार हो रहा है:

  • यूपीडा निर्माण: यदि उत्तराखंड का हिस्सा भी यूपीडा बनाती है तो पूरे कॉरिडोर पर टोल संचालन और राजस्व संग्रहण का अधिकार उत्तर प्रदेश की एजेंसी के पास रहेगा।
  • उत्तराखंड निर्माण: यदि उत्तराखंड अपने हिस्से का निर्माण स्वयं कराता है तो राज्य अपने क्षेत्र में टोल वसूली का काम संभालेगा।

टोल का गणित

निर्माण एजेंसी का फैसला सीधे टोल व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।

  • यूपीडा द्वारा निर्माण होने पर टोल अधिकार उत्तर प्रदेश के पास रहेगा।
  • उत्तराखंड द्वारा निर्माण होने पर राज्य अपने हिस्से में टोल वसूलेगा।
  • एमओयू में इस पर स्पष्ट प्रावधान किया जाएगा।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल में हरिद्वार विस्तार की घोषणा की थी।
  • इसके बाद से यूपीडा और उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग परियोजना की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
  • दोनों राज्यों का कहना है कि बातचीत सकारात्मक है और किसी प्रकार का गतिरोध नहीं है।

गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार विस्तार उत्तर भारत की सड़क कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा। प्रयागराज से हरिद्वार तक सीधी और तेज़ यात्रा संभव होगी। लेकिन अंतिम रूप से यह तय करना कि निर्माण एजेंसी कौन होगी और टोल अधिकार किसके पास रहेगा, इस परियोजना की सफलता का सबसे अहम पहलू है।