बिजनौर में साइकिल योजना ठप, स्टैंड जर्जर और साइकिलें लापता

बिजनौर शहर में नागरिकों की सुविधा और उन्हें साइकिल चलाने के लिए प्रेरित करने की प्रशासनिक पहल अब पूरी तरह ठप हो चुकी है। कोरोना काल में जब प्रवासी मजदूर अपने घर लौट रहे थे, तब उन्होंने कई साइकिलें शहर में छोड़ दी थीं। प्रशासन ने इन छोड़ी गई साइकिलों को मरम्मत कराकर जगह-जगह स्टैंड पर उपलब्ध कराया था। उद्देश्य यह था कि लोग इन साइकिलों का उपयोग कर शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक आसानी से जा सकें।

योजना की मंशा

  • साइकिल स्टैंड: शहर में कई स्थानों पर स्टैंड बनाए गए।
  • सार्वजनिक सुविधा: नागरिकों को बिना खर्च के साइकिल उपलब्ध कराना।
  • पर्यावरण हित: प्रदूषण कम करने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना।

वर्तमान स्थिति

  • साइकिलें अब लापता हैं।
  • स्टैंड जर्जर हो चुके हैं और उपयोग में नहीं हैं।
  • नागरिकों ने इस व्यवस्था को अपनाया ही नहीं, जिससे योजना असफल हो गई।

कारण और विश्लेषण

  • जनसहभागिता की कमी: लोग इस सुविधा का लाभ लेने के लिए आगे नहीं आए।
  • रखरखाव की कमी: प्रशासन ने नियमित देखरेख नहीं की।
  • सुरक्षा और जिम्मेदारी: साइकिलों की सुरक्षा और जिम्मेदारी तय नहीं की गई।

बिजनौर की यह पहल एक अच्छी सोच थी, लेकिन व्यवहारिक क्रियान्वयन और जनसहभागिता की कमी के कारण यह योजना असफल हो गई। आज स्थिति यह है कि स्टैंड खंडहर में बदल गए हैं और साइकिलें गायब हैं।