रसोईयों ने किया प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपापांच माह का बकाया मानदेय, न्यूनतम वेतन और स्थायीकरण की उठाई मांग…

बिजनौर (चिंगारी)। प्रगतिशील रसोईया संगठन जनपद बिजनौर के बैनर तले रसोईयों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। प्रदर्शन के दौरान रसोईयों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद यहां रसोईयों को सबसे कम मानदेय दिया जा रहा है।

ज्ञापन में कहा गया कि पिछले लगभग पांच माह से रसोईयों को मानदेय नहीं मिला है, जबकि पूर्व में भी मानदेय किस्तों में दिया जाता रहा है। रसोईयों ने मांग की कि दीपावली से पूर्व उनका समस्त बकाया मानदेय एकमुश्त जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि वे कुशल मजदूर की तरह कार्य करती हैं, लेकिन मेहनत के अनुरूप उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।रसोईयों ने बताया कि पांडिचेरी, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में रसोईयों को उत्तर प्रदेश की तुलना में कई गुना अधिक मानदेय दिया जा रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश में मात्र दो हजार रुपये मानदेय दिया जाता है।

उन्होंने इसे “बेगार” बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें रसोईयों से बेगार न कराने और न्यूनतम वेतन देने की बात कही गई है।ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि विद्यालयों में रसोईयों से खाना बनाने के अलावा सफाई, शौचालय साफ कराने और अन्य कार्य भी कराए जाते हैं। चुनावों के दौरान भी उनकी ड्यूटी लगाई जाती है।

18-19 वर्षों से कार्य करने के बावजूद उन्हें स्थायी नहीं किया गया है।रसोईयों ने मांग की कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन दिया जाए, स्थायी किया जाए तथा ईएसआई, पीएफ, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

साथ ही ग्राम प्रधानों और अन्य अधिकारियों द्वारा हो रहे शोषण पर रोक लगाने की भी मांग की गई।प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष रेखा, बबीता, फरजाना, आशा देवी, रीता, नीतू, शमशीदा, सलमा, शीला, बबली, पुष्पा, गुड्डी, नूरजहां सहित बड़ी संख्या में रसोईयां शामिल रहीं।