दुल्हन के हाथों की मेहंदी भी न सूखी थी कि जनाज़ा उठ गया

शादी के महज़ कुछ दिन बाद ही सड़क हादसे ने उजाड़ दी नई नवेली दुल्हन फ़िज़ा की दुनिया

मायके और ससुराल में पसरा मातम


बिजनौर (चिंगारी)।


खुशियों से महकता एक घर अचानक चीखों और सिसकियों से दहल उठा। जिन हाथों में कुछ दिन पहले ही शादी की मेहंदी रची थी, जिन आंखों में नए जीवन के हसीन सपने बसे थे, उन्हीं आंखों ने दुनिया को इतनी जल्दी अलविदा कह दिया कि हर सुनने वाला गमगीन हो उठा।
स्थानीय खस्सा कालोनी निवासी इक़रार की बेटी फ़िज़ा की शादी इसी माह 11 मई को शेरकोट निवासी शहज़ाद के साथ बड़े अरमानों और खुशियों के बीच हुई थी। परिवार ने अपनी लाड़ली को दुल्हन बनाकर विदा किया था। किसी को क्या मालूम था कि खुशियों भरी यह विदाई कुछ ही दिनों में हमेशा के लिए दुनिया से विदाई का रूप ले लेगी।
शादी के बाद शहज़ाद अपनी दुखन फ़िज़ा को चांदपुर स्थित अपनी मौसी (खाला) के यहां दावत में लेकर गया था। वहां से शहज़ाद बाइक से दुल्हन को उसके मायके वालों से मिलाने के लिए बिजनौर जा रहा था। रास्ते में छाछरी मोड़ के पास एक दर्दनाक हादसे ने शहज़ाद की जिंदगी बदल दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़क के आधे हिस्से में एक कटा हुआ पेड़ पड़ा था। जैसे ही शहज़ाद ने बाइक को पेड़ से बचाने की कोशिश की, तभी पीछे से आ रही तेज रफ्तार रोडवेज बस ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि नई नवेली दुल्हन फ़िज़ा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि उसके पति शहज़ाद को मामूली चोटें आईं।
हादसे की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। जिस घर में कुछ दिन पहले शहनाइयां गूंज रही थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है। मां-बाप अपनी जवान बेटी की मौत पर बदहवास हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हर आंख नम है और हर जुबान पर बस यही सवाल है कि आखिर इतनी जल्दी यह कहर क्यों टूट पड़ा।
लोगों की आंखें उस वक्त भर आईं जब नई नवेली दुल्हन का शव घर पहुंचा। फ़िज़ा के हाथों की मेहंदी अभी फीकी भी नहीं पड़ी थी, शादी के जोड़े की खुशबू अभी घर में मौजूद थी कि फ़िज़ा का उठ गया। जिसने भी यह मंजर देखा, उसका दिल कांप उठा।
परिजनों ने बिना किसी कानूनी कार्रवाई के शव को सुपुर्दे खाक कर लिया। पूरे इलाके में इस दर्दनाक हादसे को लेकर शोक की लहर है। हर कोई यही कह रहा है कि काश यह हादसा न हुआ होता, तो एक बेटी आज अपने नए जीवन के सपने सजा रही होती।