‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ से मुख्यमंत्री ने 8 लाख स्कूली बच्चों से किया संवाद, AI और डिजिटल तकनीक से जुड़ेगा कार्यक्रम

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेशभर के करीब 8 लाख स्कूली बच्चों से वर्चुअल संवाद किया। मुख्यमंत्री आवास से आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने विद्यार्थियों को धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज की शुभकामनाएं दीं। साथ ही बच्चों को त्योहारों के महत्व, शिक्षा, स्वच्छता, सुरक्षा, नैतिक मूल्यों और जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिए।

मुख्यमंत्री ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि प्रदेश का भविष्य आज के विद्यार्थियों के सपनों, उनकी प्रतिभा, रचनात्मकता और नई सोच पर निर्भर करता है। बच्चों को बेहतर शिक्षा, सकारात्मक वातावरण और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने में युवा पीढ़ी और स्कूली बच्चों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

बच्चों से निरंतर संवाद स्थापित करना कार्यक्रम का उद्देश्य

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ केवल एक संवाद कार्यक्रम नहीं है, बल्कि प्रदेश के बच्चों के साथ आत्मीय जुड़ाव स्थापित करने का एक प्रयास है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानना, उनकी जिज्ञासाओं को प्रोत्साहित करना और उन्हें शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक जिम्मेदारी तथा जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन देना है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों के शहरों और गांवों तक बड़ी संख्या में विद्यार्थी इस कार्यक्रम से जुड़े। आधुनिक संचार तकनीक के माध्यम से एक साथ लाखों बच्चों तक पहुंचना इस पहल की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

त्योहारों के माध्यम से संस्कृति और परंपराओं का संदेश

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज की बधाई देते हुए कहा कि भारतीय त्योहार हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारिवारिक एकता और सामाजिक सद्भाव के प्रतीक हैं।

उन्होंने बच्चों को त्योहारों के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने और सुरक्षा संबंधी सावधानियों का विशेष ध्यान रखने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संदेश भी दिया।

पढ़ाई के साथ जीवन के लक्ष्यों पर ध्यान देने की अपील

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के प्रति गंभीर रहने और जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास बेहद जरूरी हैं।

उन्होंने बच्चों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने तथा असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेने की सलाह दी। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। जरूरत केवल उसे पहचानने और सही दिशा में विकसित करने की है।

AI और डिजिटल तकनीक से और उपयोगी बनेगा कार्यक्रम

कार्यक्रम को भविष्य में अधिक प्रभावी और व्यापक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया गया। इस दिशा में कार्यक्रम को तकनीक आधारित स्वरूप प्रदान करने की योजना है, ताकि बच्चों तक उनकी जरूरतों के अनुरूप उपयोगी, ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक जानकारियां पहुंचाई जा सकें।

तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से विद्यार्थियों को शिक्षा, नवाचार, रचनात्मकता और बदलते समय की आवश्यकताओं से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी नई जानकारियों और मार्गदर्शन से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

विकसित उत्तराखंड के निर्माण में बच्चों की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बच्चों के सपने, उनकी प्रतिभा और नई सोच ही भविष्य के विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव बनेंगे। राज्य के प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर मिलें, इसके लिए शिक्षा और मार्गदर्शन से जुड़ी पहलों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।

उन्होंने विश्वास जताया कि आज के विद्यार्थी भविष्य में उत्तराखंड को शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल, संस्कृति और नवाचार के विभिन्न क्षेत्रों में नई पहचान दिलाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के बच्चों को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, सामाजिक जिम्मेदारी, संस्कार और नेतृत्व क्षमता का भी विकास हो। ‘दिल की बात, अंकल धामी के साथ’ जैसी पहल इसी दिशा में बच्चों और सरकार के बीच संवाद को मजबूत बनाने का माध्यम बन सकती है।

करीब 8 लाख विद्यार्थियों तक पहुंचे इस संवाद कार्यक्रम के माध्यम से मुख्यमंत्री ने बच्चों को यह संदेश दिया कि उनके सपने और उनकी मेहनत प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं।