हरिद्वार में आज रात 12 बजे से बंद होगी गंगनहर, दीपावली पर 7 नवंबर को दोबारा छोड़ा जाएगा पानी
हरिद्वार। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा संचालित गंगनहर को वार्षिक सफाई और मरम्मत कार्यों के लिए आज रात 12 बजे से बंद किया जाएगा। परंपरा के अनुसार, दशहरे के आसपास गंगनहर में जल प्रवाह रोककर उसकी सफाई और आवश्यक मरम्मत की जाती है। इसके बाद दीपावली के अवसर पर 7 नवंबर को गंगनहर में दोबारा पानी छोड़े जाने की बात कही गई है। गंगनहर बंद होने की इस अवधि में हरिद्वार में आगामी कुंभ मेला-2027 की तैयारियों से जुड़े कुछ आवश्यक कार्य भी किए जा सकेंगे।
गंगनहर हरिद्वार से निकलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनेक क्षेत्रों तक सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पानी पहुंचाती है। इसका जल प्रवाह कृषि, स्थानीय जल प्रबंधन और विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में गंगनहर की वार्षिक बंदी का असर हरिद्वार से लेकर नहर पर निर्भर आगे के क्षेत्रों तक महसूस किया जाता है।
सफाई और मरम्मत के लिए रोका जाएगा जल प्रवाह
गंगनहर की वार्षिक बंदी के दौरान नहर के तल में जमा गाद, मिट्टी और अन्य अवांछित सामग्री को हटाने के साथ-साथ आवश्यक मरम्मत का काम किया जाता है। नहर के विभिन्न हिस्सों की स्थिति का निरीक्षण कर उन स्थानों पर सुधार कार्य भी किए जा सकते हैं, जहां मरम्मत की आवश्यकता होती है।
इस अवधि में हरिद्वार में कुंभ मेला-2027 की तैयारियों से संबंधित प्रस्तावित कार्यों को आगे बढ़ाने का अवसर भी मिल सकता है। कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के मद्देनजर घाटों, आसपास के क्षेत्रों और संबंधित व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए समय रहते काम पूरा करना महत्वपूर्ण है।
हर की पैड़ी पर श्रद्धालुओं को हो सकती है परेशानी
गंगनहर बंद होने का सबसे अधिक असर हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं पर दिखाई देता है। हर की पैड़ी पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा-पाठ, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। गंगनहर में पानी का प्रवाह रुकने से घाटों पर सामान्य दिनों की तुलना में जल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
ऐसे अवसरों पर गंगा सभा की मांग और स्थानीय व्यवस्था के अनुसार हर की पैड़ी पर सीमित मात्रा में जल बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, यह जल सभी श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त नहीं होता। इसके चलते स्नान और धार्मिक कर्मकांड करने आने वाले लोगों को कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
श्रद्धालुओं के लिए यह स्थिति विशेष रूप से उन दिनों में चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जब धार्मिक कार्यों के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग हरिद्वार पहुंचते हैं।
गंगा की सफाई के लिए जुटेंगी सामाजिक संस्थाएं और प्रशासनिक टीमें
गंगनहर में जल प्रवाह बंद होने के बाद हरिद्वार में गंगा की सफाई का अभियान भी चलाया जाएगा। इस दौरान विभिन्न सामाजिक संस्थाएं, स्वयंसेवी संगठन और संबंधित विभागों के अधिकारी अपनी टीमों के साथ सफाई कार्य में भाग ले सकते हैं।
हरिद्वार के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें सफाई एवं व्यवस्थाओं से जुड़े कार्यों में जुट सकती हैं। हर की पैड़ी से लेकर सिंहद्वार तक गंगा के विभिन्न हिस्सों में सफाई गतिविधियां चलाए जाने की संभावना है।
इस तरह के अभियान का उद्देश्य घाटों और नदी क्षेत्र में जमा कचरे तथा अन्य अवांछित सामग्री को हटाना और धार्मिक नगरी की स्वच्छता बनाए रखने में योगदान देना है। हालांकि, अभियान में शामिल होने वाली संस्थाओं, अधिकारियों और टीमों की वास्तविक भागीदारी संबंधित प्रशासनिक कार्यक्रम पर निर्भर करेगी।
गंगनहर का जलस्तर घटने पर नदी तल तक पहुंचते हैं लोग
गंगनहर बंद होने के बाद जलस्तर कम होने पर हर की पैड़ी से लेकर सिंहद्वार तक के कुछ हिस्सों में नदी का तल दिखाई देने लगता है। इसी दौरान कुछ लोग नदी के तल में हल्की खुदाई करते हुए भी नजर आते हैं।
इनमें ऐसे लोग भी शामिल होते हैं, जो नदी में बहकर आए या लंबे समय से तल में जमा हुए सिक्के, धातु की वस्तुएं और अन्य उपयोगी सामान तलाशते हैं। कुछ लोगों के लिए यह अतिरिक्त आय का एक साधन बन जाता है। कभी-कभी उन्हें सिक्के, आभूषणों के हिस्से या अन्य मूल्यवान समझी जाने वाली वस्तुएं भी मिल जाती हैं, हालांकि ऐसी वस्तुओं का मिलना निश्चित नहीं है।
आधा से एक फीट तक की जाती है हल्की खुदाई
स्थानीय स्तर पर सामान तलाशने वाले कुछ लोग नदी का जलस्तर कम होने पर तल में लगभग आधा से एक फीट तक हल्की खुदाई करते हैं। उनका उद्देश्य मिट्टी और रेत में दबे सिक्कों तथा दूसरी छोटी वस्तुओं को खोजना होता है।
गंगनहर बंद होने की अवधि में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ सकती है। इस कारण हर की पैड़ी से सिंहद्वार तक के कुछ हिस्सों में लोगों को नदी तल पर सामान तलाशते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, नदी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की खुदाई या वस्तुओं को निकालने के दौरान स्थानीय प्रशासन के निर्देशों, सुरक्षा व्यवस्था और लागू नियमों का पालन करना आवश्यक है।
दीपावली पर पानी छोड़े जाने के बाद सामान्य होगा जल प्रवाह
गंगनहर में जल प्रवाह बंद रहने की अवधि के दौरान सफाई, मरम्मत और अन्य निर्धारित कार्य किए जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 7 नवंबर को दीपावली के अवसर पर नहर में दोबारा जल प्रवाहित किए जाने की बात कही गई है। पानी छोड़े जाने के बाद नहर में जलस्तर धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद रहेगी।
गंगनहर की वार्षिक बंदी जहां एक ओर सफाई और रखरखाव के लिए जरूरी मानी जाती है, वहीं दूसरी ओर इसका असर श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और नहर के पानी पर निर्भर क्षेत्रों पर भी पड़ता है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने चुनौती रहती है कि निर्धारित अवधि में जरूरी कार्य पूरे किए जाएं और आम लोगों को होने वाली असुविधा को यथासंभव कम रखा जाए।







