शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 1124 अंक टूटा, निफ्टी 22,800 के नीचे; निवेशकों की संपत्ति में ₹8 लाख करोड़ की कमी
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों की धारणा कमजोर रही। इसका सीधा असर घरेलू इक्विटी बाजार पर पड़ा और प्रमुख सूचकांक करीब डेढ़ फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए।
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,771.72 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 में 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,780.25 अंक पर आ गया।
बाजार में व्यापक बिकवाली का असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण करीब ₹8 लाख करोड़ घटकर लगभग ₹474 लाख करोड़ रह गया।
सेंसेक्स में 30 में से 29 शेयरों में गिरावट
सोमवार के कारोबार में सेंसेक्स के लगभग सभी प्रमुख शेयर दबाव में रहे। 30 कंपनियों वाले सेंसेक्स में 29 शेयर लाल निशान में बंद हुए, जबकि केवल एक शेयर में मामूली तेजी दर्ज की गई।
एलएंडटी और पावर ग्रिड के शेयरों में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा अदाणी पोर्ट्स, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर भी 2 प्रतिशत से अधिक नीचे रहे।
इसके विपरीत इन्फोसिस सेंसेक्स का एकमात्र प्रमुख शेयर रहा, जिसने मामूली बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया।
निफ्टी के स्तर पर जियो फाइनेंशियल, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, अदाणी एंटरप्राइजेज और अदाणी पोर्ट्स प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे। वहीं डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और इन्फोसिस में तेजी देखने को मिली।
बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही
सोमवार को केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। एनएसई पर करीब 2,716 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि लगभग 869 शेयरों में तेजी रही। करीब 91 शेयरों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
इस आंकड़े से पता चलता है कि बाजार में गिरावट कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि व्यापक स्तर पर निवेशकों ने शेयरों में बिकवाली की।
सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में गिरावट
बाजार की कमजोरी का असर लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ा। सोमवार को कोई भी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स बढ़त के साथ बंद नहीं हुआ।
निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। टेलीकॉम सेक्टर का इंडेक्स भी करीब 2 प्रतिशत नीचे रहा। इसके अलावा ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, एफएमसीजी, मेटल, प्राइवेट बैंक और रियल्टी जैसे क्षेत्रों में भी दबाव देखने को मिला।
इनमें से कई सेक्टरल इंडेक्स में लगभग 1 से 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स में अपनी हिस्सेदारी घटाने पर जोर दिया।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
बाजार में गिरावट केवल सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार के सूचकांकों में भी कमजोरी देखने को मिली।
निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी कंपनियों की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। सोमवार को इन शेयरों में भी बिकवाली बढ़ने से बाजार की समग्र कमजोरी और गहरी हुई।
ईरान-अमेरिका तनाव ने बढ़ाई चिंता
सोमवार की गिरावट के पीछे प्रमुख कारणों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव रहा। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है और निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं।
इस तनाव का सबसे सीधा असर कच्चे तेल के बाजार पर देखने को मिला। तेल की कीमतों में तेजी की आशंका ने भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर आयात लागत बढ़ सकती है। इससे महंगाई पर दबाव पड़ने के साथ-साथ कई कंपनियों की लागत भी प्रभावित हो सकती है। यही वजह रही कि तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत के रूप में देखा गया।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी भी बनी दबाव की वजह
बाजार पर दूसरा महत्वपूर्ण दबाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से आया। वैश्विक निवेशक ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रखते हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से उभरते बाजारों में निवेश को लेकर जोखिम-रिटर्न का समीकरण प्रभावित हो सकता है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
सोमवार के कारोबार में वैश्विक संकेतों और घरेलू बाजार की कमजोर धारणा ने मिलकर बिकवाली को तेज किया।
इंडिया VIX में करीब 12% उछाल
बाजार में बढ़ी अस्थिरता का संकेत इंडिया VIX में तेज उछाल से भी मिला। सोमवार को इंडिया VIX करीब 12 प्रतिशत बढ़कर 14 के आसपास पहुंच गया।
इंडिया VIX को बाजार में अपेक्षित अस्थिरता का एक प्रमुख संकेतक माना जाता है। इसके बढ़ने का अर्थ सामान्य तौर पर यह होता है कि निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
इसलिए सोमवार को VIX में तेजी और प्रमुख सूचकांकों में गिरावट ने बाजार में बढ़े जोखिम और अनिश्चितता की तस्वीर को और स्पष्ट किया।
₹8 लाख करोड़ घटा बाजार पूंजीकरण
शेयर बाजार में व्यापक गिरावट का सीधा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। सोमवार के कारोबार में बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण लगभग ₹8 लाख करोड़ कम होकर करीब ₹474 लाख करोड़ रह गया।
हालांकि बाजार पूंजीकरण में कमी का मतलब यह नहीं है कि इतनी रकम सीधे निवेशकों के बैंक खातों से निकल गई। बाजार पूंजीकरण शेयरों के बाजार मूल्य के आधार पर कंपनियों की कुल वैल्यू को दर्शाता है। शेयर कीमतों में गिरावट आने पर कंपनियों का कुल बाजार मूल्य भी घट जाता है।
आगे किन संकेतकों पर रहेगी बाजार की नजर?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, ईरान-अमेरिका तनाव, वैश्विक बाजारों के रुख, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रह सकती है।
इसके अलावा घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजे, ब्याज दरों से जुड़े संकेत और आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल सोमवार की गिरावट ने यह दिखाया कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कमोडिटी बाजार में होने वाले बदलाव भारतीय शेयर बाजार में भी तेज उतार-चढ़ाव पैदा कर सकते हैं। निवेशकों के लिए ऐसे माहौल में बाजार की व्यापक दिशा के साथ-साथ अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों से जुड़े जोखिमों पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।










