डीपफेक और CSAM कंटेंट पर जुकरबर्ग ने मांगी माफी, पीएम मोदी का वीडियो हटाने के बाद मचा बवाल
मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने डीपफेक कंटेंट, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई गलतियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। यह माफी उस विवाद के बाद आई है जब फेसबुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पेपर लीक पर युवाओं को संबोधित करने वाला वीडियो हटा दिया था।
भारत सरकार ने मेटा को साफ कर दिया कि वे IT एक्ट के तहत “इंटरमीडियरी” की परिभाषा में नहीं आते, क्योंकि वे खुद तय करते हैं कि कौन सा कंटेंट किसे दिखाया जाएगा। इस वजह से उन्हें “सेफ हार्बर” (कानूनी सुरक्षा) का लाभ नहीं मिलेगा।
🔑 जुकरबर्ग का बयान
सूत्रों के अनुसार, जुकरबर्ग ने माना कि कुछ खास तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए पैसे दिए गए थे। उन्होंने इसे गंभीर गलती बताते हुए कहा कि कंपनी को इस पर अफसोस है और भविष्य में ऐसी चूक नहीं दोहराई जाएगी।
⚖️ सरकार का अल्टीमेटम
- संसद की स्थायी समिति ने मेटा को 3 दिन का अल्टीमेटम दिया था।
- समिति ने जुकरबर्ग से माफी मांगने और प्लेटफॉर्म पर मौजूद CSAM व महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री पर रोक लगाने की मांग की थी।
- इसके अलावा, इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी कार्रवाई की सिफारिश भी की गई थी।
📊 पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर विवाद
- पीएम मोदी ने NEET पेपर लीक के मुद्दे पर युवाओं को संबोधित करते हुए वीडियो पोस्ट किया था।
- यह वीडियो इंस्टाग्राम पर रिकॉर्ड तोड़ लोकप्रियता हासिल कर चुका था और 24 घंटे में सबसे ज्यादा देखा गया वीडियो बना।
- फेसबुक ने इस वीडियो को हटा दिया, जिससे बड़ा विवाद खड़ा हो गया।
- बाद में मेटा ने सफाई दी कि वीडियो “गलती से हटाया गया था” और उसे बहाल कर दिया गया है।
🌐 बैठक और चर्चा
मेटा की ग्लोबल टीम ने IT मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में:
- पीएम मोदी के वीडियो को हटाने की गलती
- CSAM और उत्पीड़न सामग्री पर रोक लगाने में चूक
- अन्य नियामकीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
मार्क जुकरबर्ग की माफी से यह साफ है कि मेटा पर भारत सरकार का दबाव बढ़ गया है। पीएम मोदी का वीडियो हटाने की घटना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार का सख्त रुख यह संकेत देता है कि आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर और कड़े नियम लागू हो सकते हैं।







