गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे : बिजनौर में भूमि चिह्निकरण शुरू

उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। गोरखपुर से शामली तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि चिह्निकरण का कार्य बिजनौर जिले में शुरू हो गया है। यह एक्सप्रेस-वे लगभग 750 किलोमीटर लंबा और 150 मीटर चौड़ा होगा, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ेगा।

भूमि चिह्निकरण की प्रक्रिया

  • स्योहारा क्षेत्र के गांव निचलपुर और मिलक में खेतों के बीच सीमेंटेड पोल लगाकर भूमि को चिन्हित किया जा रहा है।
  • एनएचएआई की टीमें अलग-अलग स्थानों पर खुदाई कर पोल लगा रही हैं, जिससे प्रस्तावित मार्ग की निशानदेही और नापजोख की जा सके।
  • फिलहाल निचलपुर और मिलक गांवों में ही यह कार्य चल रहा है, लेकिन जल्द ही आसपास के अन्य गांवों में भी प्रक्रिया शुरू होगी।

प्रभावित क्षेत्र

  • स्योहारा क्षेत्र के लगभग 20 गांव इस परियोजना के दायरे में आएंगे।
  • बिजनौर की तहसील धामपुर के थाना स्योहारा, धामपुर और नहटौर के कुछ गांव भी इसमें शामिल हैं।
  • भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए पहले चरण में चिन्हिकरण किया जा रहा है।

परियोजना का महत्व

  • यह एक्सप्रेस-वे पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जोड़कर राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देगा।
  • बिजनौर समेत आसपास के क्षेत्रों में रोजगार और व्यापार के अवसर बढ़ेंगे।
  • परियोजना के वर्ष 2030 तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है।

स्थानीय प्रतिक्रिया

टीमों के गांवों में पहुंचने के बाद निचलपुर, मिलक और आसपास के क्षेत्रों में इस परियोजना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीणों का मानना है कि एक्सप्रेस-वे बनने से क्षेत्र का विकास होगा, लेकिन भूमि अधिग्रहण को लेकर चिंताएं भी सामने आ रही हैं।