दूध, मट्ठा, घी खाने के शौकीन 100 साल के चौ. अतर सिंह

  • शशिभूषण शर्मा
    गंज (चिंगारी)।

कमर सीधी, हाथ में वॉकिंग स्टिक तेज चाल, सिर पर टोपी.. आज भी पहचान है चौधरी अतर सिंह की। नगर से सटा एक छोटा सा गांव है गांवड़ी बुजुर्ग, जिसमें लगभग 8 दशक से अपने परिवार के साथ चौधरी अतर सिंह रहते हैं। यूं तो चौधरी अतर सिंह बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के साथ कई किसान आंदोलनों का हिस्सा बन चुके हंै किन्तु चिंगारी के पाठकों से चौधरी अतर सिंह का परिचय कराते हैं, जिनकी आयु 100 प्लस हो चुकी है।


मूल रूप से धनौरा कस्बा के पास ग्राम रामपुर के रहने वाले अतर सिंह का जन्म सन् 1917 में हुआ था। लगभग 18 साल की आयु में गांवड़ी की रहने वाली चंद्रावती से शादी हो गई। अतर सिंह बताते हैं कि उनकी बारात बैल बुग्गी से गांवड़ी पहुंची थी तथा दो दिन तक टिकी रही। लोगों की खातीरदारी और प्यार, भाईचारे की मिठास भी बरातियों ने खाने के वक्त देखी है और आज जेवड़ा खोल दावत भी मैंने देखी है। शादी के कुछ समय बाद से ही गांवड़ी में रहने लगे। चौ. अतर सिंह को बचपन से ही पहलवानी करने का शौक था। उन्होंने चांदपुर के बकरा पहलवान को हराया। नामी बकरा पहलवान ने उस समय के कई पहलवानों को हरा दिया, तब पिताजी के कहने पर जबरदस्ती अखाड़ा में उतरा क्योंकि पिताजी ने कह दिया था कि यदि कुश्ती नहीं लड़ा या कुश्ती में हार गया तो उसी दिन से दूध, मा व घी खाने को नहीं मिलेगा। तब मैं कुश्ती लड़ा भी और जीता भी।

चौधरी अतर सिंह के घर चार पुत्र और तीन पुत्री हुईं। आज 6 पौत्र, सात पड़पौत्र तथा तीन पड़पौत्र के पुत्रों के साथ परिवार में 25 सदस्य हैं। पत्नी चंद्रावती भी पूर्ण स्वस्थ चौधरी अतर सिंह ने अपनी पत्नी चंद्रावती के साथ सादगी और प्रेम के साथ जीवन बिताया। 98 साल की चंद्रावती कहती हैं कि आज तक मैंने अपना कोई काम किसी से नहीं करवाया, बस अब तो ईश्वर से एक इच्छा है कि चलते हाथ-पैरों के साथ ईश्वर अपनी शरण में ले ले। आज के लोग न सीधे न सच्चे पुराने समय में और नये युग के समाज में क्या परिवर्तन देखने को मिला- अतर सिंह बताते हैं पुराने समय में सीधे-साधे व सच्चे तथा सादगी भरे अच्छे इंसान थे किंतु आज के समय में लोग न सीधे हंै न सच्चे हैं। आज के इंसान तो जैसे हंै सब जानते ही हैं। चौधरी अतर सिंह ने हमारे साथ कुछ दूर पैदल चलकर गांव की ही 90 प्लस दो महिलाओं इमरती देवी तथा मूर्ति देवी से मिलवाया, जो इस समय कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं हंै। पैदल चलना अच्छे स्वास्थ्य का राज चौधरी अतर सिंह ने दीर्घायु व स्वस्थ रहने के पीछे मा, देसी घी व दूध को बताया। सुबह और शाम व्यायाम तथा दिन में पैदल चलने को वह अपने स्वास्थ्य का राज मानते हैं। अतर सिंह आज भी तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर गांवड़ी से गंज आ जाते हैं। चौधरी अतर सिंह बताते हैं कि आज तक कभी भी उन्हें बुखार नहीं आया। किसी लग्न-रिश्ता, शादी-बारात में दावत का खाना खाने पर पेट तो खराब हो जाता है। किंतु और कोई समस्या नहीं आती। जब खेती के आधुनिक साधन नहीं थे तब लगभग 100 बीघा की खेती अतर सिंह अपने भाईयों के साथ दो हल- बैलों से करते थे। यदा-कदा मजदूर पकडऩा पड़ता था।